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महाशिवरात्रि पर 15 फरवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग, 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण

 

इस साल महाशिवरात्रि 15 फरवरी, 2026 को मनाई जाएगी और इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार, यह योग सभी प्रकार के कार्यों में सफलता दिलाने वाला माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना और साधना करके अपने जीवन में सफलता, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति की कामना कर सकते हैं।

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस संयोजन से सूर्य और चंद्रमा दोनों का फल मिलने की संभावना होती है। यह योग धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस दिन पंचाक्षर मंत्र "ॐ नमः शिवाय" का जाप और पार्थिव शिवलिंग पूजन का विधान किया जाता है। इन्हें करने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। श्रद्धालु रात के समय विशेष रूप से शिवलिंग पर जल, दूध, पंचामृत और बेलपत्र अर्पित करते हैं।

महाशिवरात्रि पर व्रत और उपवास का विशेष महत्व होता है। ज्योतिषियों का कहना है कि इस दिन किए गए व्रत, दान और पूजा के प्रभाव पूरे वर्ष तक रह सकते हैं। यह दिन न केवल भगवान शिव की आराधना का है, बल्कि आंतरिक साधना और ध्यान के लिए भी आदर्श माना जाता है।

इसी क्रम में 17 फरवरी, 2026 को सूर्य ग्रहण भी होने वाला है। हालांकि, भारत में यह ग्रहण अदृश्य होगा, इसलिए शास्त्रों के अनुसार इसका सूतक काल लागू नहीं होगा। इसका अर्थ है कि ग्रहण के समय घर में किसी भी प्रकार की बाधा या विशेष रोक-टोक नहीं मानी जाएगी। लोग सामान्य दैनिक कार्य कर सकते हैं, लेकिन धार्मिक दृष्टि से ग्रहणकाल में पूजा-पाठ और भोजन संबंधी सावधानियां अपनाई जाती हैं।

ज्योतिषाचार्यों ने इस अवसर पर यह भी बताया कि महाशिवरात्रि और सूर्य ग्रहण के बीच समय का सदुपयोग करते हुए लोग अपने आध्यात्मिक अभ्यास को बढ़ा सकते हैं। इस समय ध्यान, मंत्र जाप और धार्मिक कार्य करना अत्यंत फलदायी होता है।

श्रद्धालु इस महाशिवरात्रि पर मंदिरों और पवित्र स्थानों पर जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक और पूजा कर सकते हैं। इसके साथ ही व्यक्तिगत घर पर भी शिवलिंग की स्थापना और पूजन किया जा सकता है।

अंततः, 15 फरवरी को बनने वाला सर्वार्थ सिद्धि योग और दुर्लभ नक्षत्र संयोग जीवन में सफलता, शांति और समृद्धि लाने वाला है। साथ ही, 17 फरवरी का अदृश्य सूर्य ग्रहण धार्मिक दृष्टि से विशेष सावधानी का संकेत देता है। इस अवसर का लाभ उठाकर श्रद्धालु अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सकते हैं।