आगरा की नौ विधानसभा सीटों में 3.25 लाख मतदाताओं को नोटिस, दस्तावेज जुटाने में हो रही भारी परेशानी
आगरा जिले की नौ विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग की ओर से बड़ी कार्रवाई की गई है। इसके तहत करीब 3.25 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। इन मतदाताओं को अपना मताधिकार सिद्ध करने के लिए आवश्यक दस्तावेज और प्रमाणपत्र 24 फरवरी तक सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे।
नोटिस जारी होने के बाद मतदाताओं में हड़कंप मचा हुआ है। आयोग के निर्देशानुसार, सुनवाई और सत्यापन के दौरान जन्म प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र या निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित 13 वैकल्पिक दस्तावेजों में से कोई एक प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है। लेकिन समस्या यह है कि हजारों मतदाताओं के पास इनमें से एक भी पुख्ता दस्तावेज उपलब्ध नहीं है।
दस्तावेज बनवाने के लिए मतदाता सदर तहसील से लेकर बाह और खेरागढ़ तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। तहसील और ब्लॉक स्तर पर प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदनों का अंबार लग चुका है। रोजाना सैकड़ों लोग सुबह से ही कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं, लेकिन प्रक्रिया की जटिलता और सीमित संसाधनों के चलते काम तेजी से नहीं हो पा रहा है।
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने के लिए की जा रही है। इसके तहत वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग को अनिवार्य किया गया है, ताकि फर्जी, डुप्लीकेट या अपात्र नामों को हटाया जा सके। हालांकि, इस प्रक्रिया का सबसे ज्यादा असर गरीब, मजदूर और ग्रामीण तबके के मतदाताओं पर पड़ रहा है, जिनके पास वर्षों पुराने दस्तावेज मौजूद नहीं हैं।
मतदाताओं का कहना है कि कई लोग दशकों से मतदान करते आ रहे हैं, लेकिन अब अचानक उनसे ऐसे दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जो बनवाना आसान नहीं है। कुछ बुजुर्ग मतदाताओं ने बताया कि उनके पास न तो जन्म प्रमाण पत्र है और न ही कोई अन्य वैध कागज, जिससे वे अपनी पहचान सिद्ध कर सकें।
तहसील स्तर के अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों के लिए आवेदन की संख्या अचानक बहुत बढ़ गई है। कर्मचारियों पर काम का दबाव है, लेकिन नियमानुसार प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। वहीं, प्रशासन ने दावा किया है कि मतदाताओं को हरसंभव मदद देने के निर्देश दिए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते दस्तावेज जमा नहीं हो पाए, तो बड़ी संख्या में मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से हटने का खतरा भी बना रह सकता है। इससे आने वाले चुनावों में मतदान प्रतिशत पर असर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, निर्वाचन आयोग की मंशा भले ही मतदाता सूची को पारदर्शी और शुद्ध बनाने की हो, लेकिन मौजूदा प्रक्रिया की जटिलता आम मतदाताओं के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि प्रशासन 24 फरवरी से पहले इस समस्या का कितना प्रभावी समाधान निकाल पाता है।