नर्मदा में NGT की रोक बेअसर! जलस्तर बढ़ने के बावजूद धड़ल्ले से जारी अवैध रेत खनन, दिन-रात दौड़ रहीं ट्रैक्टर-ट्रॉलियां
मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में नर्मदा नदी से अवैध रेत खनन का मामला एक बार फिर सामने आया है। बुधनी रोड स्थित नर्मदा ब्रिज के पास राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की रोक के बावजूद खनन माफिया बेखौफ होकर दिनदहाड़े रेत का अवैध उत्खनन कर रहे हैं। चिंताजनक बात यह है कि नर्मदा नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद भी खनन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दिन और रात लगातार आवाजाही कर रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।
दिनदहाड़े निकाली जा रही रेत
बताया जा रहा है कि बुधनी रोड पर नर्मदा ब्रिज के आसपास खनन माफिया खुलेआम नदी से रेत निकाल रहे हैं। एनजीटी के प्रतिबंध और मानसून के दौरान बढ़े जलस्तर के बावजूद मशीनों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए अवैध खनन जारी है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गतिविधियां लंबे समय से चल रही हैं, जिससे नदी के प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ सकता है।
दिन-रात दौड़ रही ट्रैक्टर-ट्रॉलियां
अवैध खनन के बाद रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दिन और रात दोनों समय मुख्य मार्गों से गुजर रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ओवरलोड वाहनों की आवाजाही से सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में वाहनों का संचालन होने के बावजूद प्रशासन की कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।
पर्यावरण को नुकसान की आशंका
विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान नदी से रेत निकालना नदी के प्रवाह, तटों की स्थिरता और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए नुकसानदायक हो सकता है। यही वजह है कि ऐसे समय में रेत खनन पर प्रतिबंध लगाया जाता है।इसके बावजूद यदि अवैध खनन जारी रहता है तो इससे नदी के किनारों के कटाव और पर्यावरणीय संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन, खनिज विभाग और संबंधित अधिकारियों से अवैध रेत खनन पर तत्काल रोक लगाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो नर्मदा नदी और आसपास के पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।फिलहाल नर्मदापुरम में नर्मदा नदी से अवैध रेत खनन का यह मामला एक बार फिर प्रशासनिक निगरानी और कानून के पालन पर सवाल खड़े कर रहा है।