ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले में नया मोड़: सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षकारों को भेजा नोटिस, 14 जुलाई को मध्यस्थता के लिए बुलाया
ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी वाद में एक बार फिर नया मोड़ सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में मध्यस्थता के जरिए समाधान निकालने की पहल करते हुए सभी पक्षकारों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट की ओर से जारी नोटिस में सभी पक्षों को 14 जुलाई को उपस्थित होकर न्यायाधीश के समक्ष मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल होने को कहा गया है।
जानकारी के अनुसार, ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी वाद लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन है। इस मामले को लेकर अलग-अलग पक्षों की ओर से दावे और आपत्तियां सामने आती रही हैं। अब सुप्रीम कोर्ट ने मामले को बातचीत और सहमति के माध्यम से सुलझाने की संभावना तलाशने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी नोटिस में सभी संबंधित पक्षकारों को निर्धारित तारीख पर कोर्ट में मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट का उद्देश्य मध्यस्थता के माध्यम से विवाद का समाधान तलाशना है, ताकि मामले को आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सके।
इस मामले में हिंदू और मुस्लिम पक्षकार लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। ज्ञानवापी परिसर से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर वाराणसी की अदालतों से लेकर उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट तक में सुनवाई हो चुकी है। अब सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता की पहल को मामले के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नोटिस जारी होने के बाद सभी पक्षकारों की नजर 14 जुलाई की सुनवाई पर टिकी हुई है। कोर्ट में होने वाली मध्यस्थता प्रक्रिया के दौरान दोनों पक्षों की ओर से अपनी-अपनी बात रखी जाएगी। इसके बाद ही आगे की दिशा स्पष्ट हो सकेगी।
मामले से जुड़े पक्षों का कहना है कि वे कोर्ट के निर्देशों का पालन करेंगे। वहीं, कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, न्यायालयों में लंबित मामलों में मध्यस्थता के जरिए समाधान निकालने का प्रयास विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से खत्म करने की एक प्रक्रिया है।
गौरतलब है कि ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामला देश के चर्चित धार्मिक मामलों में शामिल है। इस पर देशभर की नजर रहती है और समय-समय पर इसकी सुनवाई को लेकर चर्चाएं तेज होती रही हैं।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अब 14 जुलाई को होने वाली मध्यस्थता प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सभी पक्षों की मौजूदगी में होने वाली इस कार्यवाही से यह तय होगा कि मामले में आगे की राह किस दिशा में जाती है।