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पूर्वांचल विश्वविद्यालय में पारदर्शिता की नई पहल: स्वर्ण पदक विजेता छात्रों की सभी उत्तर पुस्तिकाएं अब वेबसाइट पर होंगी उपलब्ध

 

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय (Veer Bahadur Singh Purvanchal University) में शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। अब विश्वविद्यालय के स्वर्ण पदक विजेता छात्र-छात्राओं की सभी सेमेस्टर की उत्तर पुस्तिकाएं विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएंगी। इस संबंध में राजभवन सचिवालय (Raj Bhavan Secretariat Uttar Pradesh) की ओर से औपचारिक निर्देश जारी किए गए हैं।

इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और परीक्षा प्रणाली पर छात्रों का विश्वास और अधिक मजबूत करना है। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल से यह स्पष्ट होगा कि स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का मूल्यांकन किस आधार पर किया गया है और किस तरह अंक प्रदान किए गए हैं।

जानकारी के मुताबिक, यह व्यवस्था सभी विषयों और सभी सेमेस्टर की उत्तर पुस्तिकाओं पर लागू होगी, जिन छात्रों को स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ है। विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि उत्तर पुस्तिकाओं को डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाए और उन्हें वेबसाइट पर व्यवस्थित तरीके से अपलोड किया जाए, ताकि छात्र और संबंधित लोग आसानी से उन्हें देख सकें।

राजभवन सचिवालय के निर्देशों में यह भी कहा गया है कि इस पहल से मूल्यांकन प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ेगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता या संदेह की स्थिति को दूर किया जा सकेगा। साथ ही, यह कदम अन्य विश्वविद्यालयों के लिए भी एक उदाहरण साबित हो सकता है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस दिशा में तैयारी शुरू कर दी है और तकनीकी टीम को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि डेटा सुरक्षा और गोपनीयता का पूरा ध्यान रखते हुए इस प्रक्रिया को लागू किया जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक समस्या न हो।

छात्रों और शिक्षा विशेषज्ञों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि छात्रों को यह समझने का अवसर भी मिलेगा कि उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए किस स्तर की उत्तर लेखन क्षमता आवश्यक होती है।

फिलहाल विश्वविद्यालय जल्द ही इस व्यवस्था को लागू करने की तैयारी में जुटा है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले शैक्षणिक सत्र से यह प्रणाली प्रभावी रूप से कार्य करना शुरू कर देगी।