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जंगल सफारी में प्लास्टिक पर रोक की नई पहल, कांच की बोतल लौटाने पर वापस मिलेगी जमा राशि

 

पर्यावरण संरक्षण और जंगलों में प्लास्टिक कचरे को कम करने के उद्देश्य से वन विभाग ने एक नई पहल शुरू करने की तैयारी की है। इसके तहत जंगल सफारी पर आने वाले पर्यटकों को एक निश्चित राशि जमा कराने के बाद कांच की पानी की बोतलें उपलब्ध कराई जाएंगी।

अधिकारियों के अनुसार, यह व्यवस्था जंगल क्षेत्रों को स्वच्छ रखने और वन्यजीवों को प्लास्टिक प्रदूषण से बचाने के लिए लागू की जा रही है।

कैसे काम करेगी नई व्यवस्था?

नई प्रणाली के तहत पर्यटकों से कांच की बोतल के बदले एक सुरक्षा राशि (डिपॉजिट) ली जाएगी। सफारी पूरी होने के बाद जब पर्यटक रिजर्व क्षेत्र से बाहर निकलेंगे, तो उन्हें निर्धारित कलेक्शन सेंटर पर बोतल वापस करनी होगी।

बोतल लौटाने पर जमा की गई पूरी राशि वापस कर दी जाएगी।

प्लास्टिक कचरे पर लगेगी रोक

वन अधिकारियों का मानना है कि जंगलों में छोड़ी गई प्लास्टिक की बोतलें और अन्य कचरा वन्यजीवों और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनते हैं। कांच की बोतलों और डिपॉजिट सिस्टम से पर्यटकों को बोतल वापस करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे कचरा फैलने की समस्या कम होगी।

पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

इस पहल का उद्देश्य पर्यटकों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है। कई राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों में पहले से ही सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लागू है, और यह कदम उसी दिशा में एक और प्रयास माना जा रहा है।

पर्यटकों को मिलेगी सुविधा

अधिकारियों का कहना है कि कलेक्शन सेंटरों की व्यवस्था ऐसे स्थानों पर की जाएगी, जहां पर्यटक आसानी से बोतलें वापस कर सकें। इससे प्रक्रिया सरल और सुविधाजनक बनी रहेगी।

स्वच्छ पर्यटन की दिशा में कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि "रिफंडेबल डिपॉजिट सिस्टम" दुनिया के कई देशों में सफल साबित हुआ है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जिम्मेदार पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है।

वन विभाग को उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था से जंगल सफारी के दौरान कचरे की मात्रा में कमी आएगी और प्राकृतिक आवासों को स्वच्छ एवं सुरक्षित बनाए रखने में मदद मिलेगी।