MBBS-BDS छात्रों का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन, KGMU समेत मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग
उत्तर प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे MBBS और BDS छात्रों ने शुक्रवार को इंटर्नशिप स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया। राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) समेत कई मेडिकल संस्थानों के छात्रों ने प्रदर्शन कर सरकार से AIIMS और SGPGI के बराबर इंटर्नशिप स्टाइपेंड देने की मांग उठाई।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि मेडिकल इंटर्नशिप के दौरान वे अस्पतालों में मरीजों की देखभाल, इमरजेंसी सेवाओं और अन्य चिकित्सकीय जिम्मेदारियों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड अन्य प्रमुख चिकित्सा संस्थानों की तुलना में काफी कम है। छात्रों ने सरकार से इस अंतर को खत्म करने की मांग की है।
छात्रों का कहना है कि देश के कई प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में इंटर्न डॉक्टरों को बेहतर स्टाइपेंड दिया जा रहा है, जबकि उत्तर प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में राशि काफी कम है। उनका तर्क है कि बढ़ती महंगाई और मेडिकल शिक्षा से जुड़े खर्चों को देखते हुए स्टाइपेंड में वृद्धि जरूरी है।
KGMU सहित अन्य मेडिकल कॉलेजों में छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताया और अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए। छात्रों ने कहा कि वे लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने मांग की कि प्रदेश सरकार जल्द से जल्द इस मामले पर विचार करे और इंटर्न डॉक्टरों को AIIMS तथा SGPGI के समान स्टाइपेंड उपलब्ध कराया जाए। उनका कहना है कि इससे छात्रों को आर्थिक राहत मिलेगी और वे बेहतर तरीके से अपनी इंटर्नशिप की जिम्मेदारियां निभा सकेंगे।
वहीं, मेडिकल कॉलेज प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की ओर से छात्रों की मांगों पर चर्चा की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि छात्रों की समस्याओं को उच्च स्तर तक पहुंचाया जाएगा और नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा।
मेडिकल छात्र संगठनों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे आगे भी आंदोलन जारी रखने पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, छात्रों ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करना नहीं, बल्कि अपनी जायज मांगों को सरकार तक पहुंचाना है।
अब सभी की नजरें प्रदेश सरकार के रुख पर टिकी हैं। छात्र उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार जल्द ही इंटर्नशिप स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर सकारात्मक फैसला लेगी।