गोरखपुर के डढवा गांव में बिजली हादसे में मां-बेटे की दर्दनाक मौत
डढवा गांव में मंगलवार को एक भयावह हादसा हुआ, जिसमें बिजली के तार की चपेट में आने से मां रीता देवी और उनके बेटे हिमांशु की मौत हो गई। घटना ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है। दोनों का अंतिम संस्कार कुआनो नदी के बनकटी घाट पर एक ही चिता पर किया गया, जिसमें परिवार, गांववाले और रिश्तेदार शामिल हुए।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, रीता देवी (उम्र लगभग 35 वर्ष) और उनके 10 वर्षीय बेटे हिमांशु शाम को घर के पास ही लगे बिजली के तार के पास खेल रहे थे। अचानक कोई टूटे या ढीले तार की चपेट में आने से दोनों गंभीर रूप से झुलस गए। आसपास के लोगों ने तुरंत उन्हें पास के स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की कोशिश की, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
गांववासियों का कहना है कि यह क्षेत्र बिजली के तारों के कमजोर और ढीले होने की समस्या से पहले से जूझ रहा है। कई बार ग्रामीणों ने स्थानीय बिजली विभाग को इस संबंध में चेतावनी दी थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इस हादसे ने गांव में बिजली सुरक्षा की गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
अंतिम संस्कार के समय गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार के लोग और ग्रामीण भारी भावनाओं के साथ दोनों को अंतिम विदाई दे रहे थे। स्थानीय नेताओं और सामाजिक संगठनों ने भी परिवार को सांत्वना दी और बिजली विभाग पर जिम्मेदारी न निभाने का आरोप लगाया।
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की ढीली वायरिंग और टूटी तारों से जुड़े हादसे आम हैं, और अक्सर समय पर कार्रवाई न होने के कारण मानव जीवन की भारी क्षति होती है। उन्होंने बिजली विभाग से अपील की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण और सुरक्षा मानकों को कड़ाई से लागू किया जाए।
स्थानीय प्रशासन ने घटना के बाद मौके का दौरा किया और प्राथमिक जांच में पाया कि हादसा बिजली की पुरानी और कमजोर तारों के कारण हुआ। अधिकारियों ने कहा कि दोषी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और प्रभावित परिवार को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
गांववासी अब सुरक्षा उपायों को लेकर चिंता में हैं और बिजली विभाग से मांग कर रहे हैं कि जल्द ही पूरे गांव में तार बदलकर और सुरक्षा उपकरण लगाकर भविष्य में ऐसे हादसों से बचाव किया जाए।
इस घटना ने यह संदेश भी दिया कि बिजली सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लेने पर कितना बड़ा नुकसान हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि परिवारों को बच्चों को खुले स्थानों में बिजली तारों से दूर रहने की चेतावनी देना अत्यंत आवश्यक है।
रीता देवी और हिमांशु की मौत ने डढवा गांव को सदमे में डाल दिया है, और ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी घटनाएँ रोकी जा सकती थीं यदि समय रहते सुरक्षा उपाय अपनाए जाते। प्रशासन और बिजली विभाग पर दबाव बढ़ रहा है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में तारों और बिजली सुरक्षा का तुरंत निरीक्षण करें और भविष्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचें।
गोरखपुर में यह हादसा एक बार फिर यह याद दिलाता है कि बिजली सुरक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण कितने महत्वपूर्ण हैं।