गंगा के कटाव से बचेंगे 40 से ज्यादा गांव, बिजनौर में पहली बार इस्तेमाल हो रही आधुनिक ACBM तकनीक
उत्तर प्रदेश के बिजनौर में गंगा नदी के कटाव और बाढ़ से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए आधुनिक ACBM तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस नई तकनीक को पारंपरिक बाढ़ सुरक्षा उपायों की तुलना में अधिक प्रभावी माना जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि इसके जरिए 40 से अधिक संवेदनशील गांवों और हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि को सुरक्षित किया जा सकेगा।
गंगा किनारे बसे कई गांव वर्षों से नदी के कटाव और बाढ़ की समस्या से जूझ रहे हैं। बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने पर खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों को भारी नुकसान पहुंचता है। ऐसे में इस चुनौती से निपटने के लिए सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ACBM तकनीक विदेशों में नदी तटों को मजबूत बनाने और कटाव रोकने के लिए सफलतापूर्वक इस्तेमाल की जा चुकी है। यह प्रणाली नदी के तेज बहाव के प्रभाव को कम करने और तटों को स्थिर बनाए रखने में मदद करती है। इसके कारण मिट्टी का कटाव कम होता है और आसपास की जमीन सुरक्षित रहती है।
अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद गंगा किनारे स्थित कई गांवों को राहत मिलेगी। साथ ही किसानों की हजारों हेक्टेयर उपजाऊ भूमि को भी कटाव और बाढ़ से बचाया जा सकेगा। इससे कृषि उत्पादन पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव में भी कमी आने की उम्मीद है।
स्थानीय किसानों और ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यदि यह तकनीक सफल साबित होती है तो हर साल होने वाले नुकसान से बड़ी राहत मिलेगी और लोगों के घरों व खेतों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
गौरतलब है कि गंगा के कटाव की समस्या बिजनौर के कई इलाकों में लंबे समय से बनी हुई है। ऐसे में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से बाढ़ प्रबंधन और नदी संरक्षण के क्षेत्र में एक नई शुरुआत मानी जा रही है।