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मेरठ में विदेशी नागरिक ने बनवाए दो वोटर कार्ड, जांच में पकड़ी गई लापरवाही

 

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक अनोखा मामला सामने आया है, जो वोटर लिस्ट और पहचान दस्तावेजों की संवेदनशीलता को उजागर करता है। नादिर अली बिल्डिंग की निवासी फरहत मसूद से शादी कर लगभग 37 साल पहले भारत आई पाकिस्तान निवासी सबा मसूद उर्फ नाजिया पर वर्ष 2003 में दो अलग-अलग नाम से वोटर कार्ड बनवाने का आरोप लगा है।

जानकारी के अनुसार, सबा मसूद ने भारतीय निर्वाचन क्षेत्र में दो अलग-अलग नामों से वोटर कार्ड बनवाए। अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई न केवल कानूनी रूप से गलत है, बल्कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भी गंभीर खतरे का संकेत देती है।

स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच जारी है। इस दौरान यह पता लगाया जा रहा है कि वोटर कार्ड बनाने के पीछे किसी प्रकार की धांधली या छल-प्रपंच तो नहीं किया गया। अधिकारी यह भी देख रहे हैं कि इसके पीछे किसी राजनीतिक या व्यक्तिगत लाभ का मामला तो नहीं है।

विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी नागरिकों के लिए वोटर कार्ड बनाना भारतीय कानून के तहत गंभीर अपराध है। उन्होंने कहा कि इस तरह की लापरवाही से मतदाता सूची की विश्वसनीयता प्रभावित होती है और लोकतंत्र की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

पुलिस और निर्वाचन अधिकारियों ने दोनों वोटर कार्ड को कब्जे में लिया है और सबा मसूद से पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय लोग और समाजसेवी इस मामले से स्तब्ध हैं। उनका कहना है कि वोटर कार्ड जैसी संवेदनशील जानकारी का दुरुपयोग लोकतंत्र के लिए खतरा है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाए और भविष्य में मतदाता सूची की जांच में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला मतदान प्रणाली की सुरक्षा और पहचान दस्तावेजों की वैधता की दिशा में गंभीर सवाल उठाता है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को सुनिश्चित करना चाहिए कि विदेशी नागरिक या किसी भी गैर-योग्य व्यक्ति को मताधिकार की सुविधा न मिले।

निर्वाचन आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और कहा है कि ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए नियमित निरीक्षण और सत्यापन प्रक्रियाओं को और मजबूत किया जाएगा। अधिकारी यह भी बता रहे हैं कि भविष्य में इस प्रकार की धांधली को रोकने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड और पहचान सत्यापन प्रणाली का उपयोग बढ़ाया जाएगा।

मेरठ में यह मामला न केवल स्थानीय प्रशासन के लिए बल्कि पूरे राज्य के निर्वाचन क्षेत्र के लिए चेतावनी साबित हो रहा है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि मतदाता सूची की निगरानी और पहचान दस्तावेजों की सत्यता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।