मेरठ में डिप्टी सीएम बृजेश पाठक भावुक, कवि सम्मेलन में साझा किया अपने बचपन का संघर्ष
उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक गुरुवार को मेरठ दौरे पर भावुक नजर आए। उनका यह भावुक रूप कवि सम्मेलन के कार्यक्रम में सामने आया, जहां उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए अपने बचपन और गरीबी के दिनों की कहानी साझा की।
कार्यक्रम के दौरान डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने कहा कि उन्होंने भी अपना बचपन आर्थिक तंगी में बिताया है और गरीबों की तकलीफों को भली-भांति समझते हैं। उन्होंने अपने उद्बोधन में भावुक होते हुए यह भी कहा कि वह आज जिस पद पर हैं, उसे पाने के योग्य खुद को नहीं मानते।
बृजेश पाठक ने कहा, “गरीबों और जरूरतमंदों के दर्द को महसूस करना ही मेरा जीवन का मूल मंत्र रहा है। मैंने भी कठिन परिस्थितियों का सामना किया है और इस अनुभव ने मुझे हमेशा यह सिखाया कि संकट में दूसरों की मदद करना कितना महत्वपूर्ण है।”
कवि सम्मेलन के आयोजकों और उपस्थित जनता ने डिप्टी सीएम की यह भावुकता देखा और उनका सम्मान करते हुए तालियों की गड़गड़ाहट से उनकी भावनाओं का स्वागत किया। कार्यक्रम में उनके सहज और संवेदनशील अंदाज ने जनता के बीच एक गहरा प्रभाव छोड़ा।
डिप्टी सीएम ने अपने उद्बोधन में यह भी स्पष्ट किया कि उनका राजनीतिक जीवन केवल जन सेवा और गरीबों के उत्थान के लिए समर्पित है। उन्होंने कहा कि सत्ता पर बैठे रहना कोई लक्ष्य नहीं है, बल्कि जनता की भलाई के लिए काम करना ही सबसे बड़ा उद्देश्य है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बृजेश पाठक का यह भावुक रूप न केवल उनकी व्यक्तिगत संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि यह जनता के साथ उनके सजीव संपर्क का भी प्रतीक है। उनका कहना है कि नेताओं का जन संपर्क केवल भाषणों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि अपने अनुभव साझा करके लोगों को प्रेरित करना भी आवश्यक है।
इस कवि सम्मेलन में डिप्टी सीएम ने साहित्य और कला के माध्यम से लोगों को संदेश देने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि कविताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम मन और हृदय तक पहुंचते हैं, जिससे लोगों में सामाजिक और नैतिक जागरूकता बढ़ती है।
स्थानीय लोगों ने भी डिप्टी सीएम की भावुकता और उनके सहज संवाद की सराहना की। उन्होंने कहा कि नेताओं का जनता के प्रति ऐसा सहज और संवेदनशील व्यवहार समाज में भरोसा और सकारात्मक ऊर्जा पैदा करता है।
कुल मिलाकर, मेरठ में डिप्टी सीएम बृजेश पाठक का यह भावुक रूप उनके मानवीय पहलू और संवेदनशील नेतृत्व को उजागर करता है। गरीबों और जरूरतमंदों के प्रति उनकी सहानुभूति और बचपन की कठिनाइयों को साझा करने की उनकी पहल ने न केवल जनता को भावविभोर किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि सच्चा नेतृत्व अनुभव और संवेदनाओं से जुड़ा होता है।