BHU में MA छात्र रौनक मिश्रा निलंबित, अनुशासनहीनता के मामले में कई प्रतिबंध लागू
वाराणसी स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय प्रशासन ने अनुशासनहीनता से जुड़े मामले में एमए के छात्र रौनक मिश्रा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। विश्वविद्यालय ने छात्र को निलंबित कर दिया है। साथ ही ईसीआर-264 के तहत निलंबन अवधि में उस पर कई प्रतिबंध भी लागू किए गए हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई के बाद छात्र के कैंपस में प्रवेश और शैक्षणिक गतिविधियों में भागीदारी को लेकर भी नियम निर्धारित किए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निलंबन अवधि के दौरान छात्र को विश्वविद्यालय के निर्धारित अनुशासनात्मक नियमों का पालन करना होगा।
अनुशासनहीनता के मामले में कार्रवाई
BHU प्रशासन के अनुसार छात्र के खिलाफ अनुशासनहीनता से संबंधित मामला सामने आया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय स्तर पर कार्रवाई की गई।
जांच और संबंधित प्रक्रिया के बाद छात्र को निलंबित करने का फैसला लिया गया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के नियमों के तहत उस पर अतिरिक्त प्रतिबंध भी लगाए गए हैं।
ईसीआर-264 के तहत लागू हुए प्रतिबंध
विश्वविद्यालय ने छात्र के निलंबन का आदेश ईसीआर-264 के तहत जारी किया है। निलंबन की अवधि में छात्र पर विश्वविद्यालय परिसर और उसकी शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़े कई प्रतिबंध लागू रहेंगे।
ऐसे मामलों में विश्वविद्यालय प्रशासन अनुशासन बनाए रखने के लिए संबंधित छात्र की गतिविधियों पर रोक लगा सकता है। इसका उद्देश्य परिसर में अनुशासन और शैक्षणिक वातावरण बनाए रखना है।
निलंबन अवधि में कैंपस गतिविधियों पर असर
निलंबन के दौरान रौनक मिश्रा की विश्वविद्यालय से जुड़ी नियमित शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित रहेंगी। प्रशासन की ओर से निर्धारित प्रतिबंधों के तहत ही छात्र को किसी तरह की अनुमति मिल सकेगी।
विश्वविद्यालय का कहना है कि अनुशासनहीनता के मामलों में नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाती है, ताकि कैंपस में विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए सुरक्षित एवं अनुशासित वातावरण कायम रहे।
BHU प्रशासन ने अपनाया सख्त रुख
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय देश के प्रमुख केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शामिल है। यहां अनुशासन से जुड़े मामलों में प्रशासन की ओर से समय-समय पर कार्रवाई की जाती रही है।
रौनक मिश्रा के मामले में भी विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियमों के तहत निलंबन की कार्रवाई की है। अब निलंबन अवधि में छात्र पर लगाए गए प्रतिबंध प्रभावी रहेंगे।
विश्वविद्यालय के आदेश के अनुसार आगे की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत होगी। मामले से जुड़े सभी पक्षों को विश्वविद्यालय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना होगा।