लखनऊ विश्वविद्यालय से कर्मचारियों की छुट्टी का आरोप, बोले- 5 साल काम के बाद बिना नोटिस निकाला; वेतन बढ़ने का था इंतजार
लखनऊ विश्वविद्यालय में काम करने वाले कर्मचारियों ने अचानक नौकरी से हटाए जाने का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने कई वर्षों तक विश्वविद्यालय में सेवाएं दीं, लेकिन बिना किसी पूर्व सूचना और नोटिस के उन्हें काम से हटा दिया गया। कर्मचारियों ने इसे अन्याय बताते हुए अपनी समस्या सामने रखी है।
एक महिला कर्मचारी ने बताया कि वह पिछले पांच साल से लखनऊ विश्वविद्यालय में काम कर रही थीं। उन्होंने कहा कि शुरुआत में उनकी सैलरी 8 हजार रुपये थी और धीरे-धीरे अनुभव के साथ वेतन बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन जब वेतन बढ़ोतरी का समय आया तो अचानक उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया।
"बिना बताए निकाल दिया गया"
कर्मचारी ने कहा, "मैं लखनऊ विश्वविद्यालय में 5 साल से काम कर रही थी। अचानक यहां से निकाल दिया गया। 8 हजार रुपये से वेतन की शुरुआत हुई थी और अब जब सैलरी बढ़ाने का मौका आया तो बिना कुछ कहे हमें बाहर कर दिया गया।"
उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को हटाने से पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया और न ही कारण बताया गया। कर्मचारियों का कहना है कि पूछने पर भी अधिकारी स्पष्ट जानकारी देने को तैयार नहीं हैं।
कर्मचारियों में नाराजगी
नौकरी जाने से प्रभावित कर्मचारियों में नाराजगी है। उनका कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक विश्वविद्यालय के लिए काम किया और पूरी जिम्मेदारी से अपनी सेवाएं दीं। ऐसे में अचानक नौकरी खत्म कर देना उनके लिए आर्थिक संकट खड़ा कर रहा है।
कर्मचारियों ने मांग की है कि उन्हें हटाने के फैसले पर पुनर्विचार किया जाए और उचित प्रक्रिया अपनाई जाए। उनका कहना है कि यदि किसी कारण से कर्मचारियों को हटाया जा रहा है तो पहले इसकी जानकारी दी जानी चाहिए थी।
वेतन वृद्धि से पहले लिया गया फैसला?
कर्मचारियों का आरोप है कि वेतन बढ़ोतरी की उम्मीद के बीच यह कार्रवाई की गई। उनका कहना है कि वर्षों तक कम वेतन में काम करने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि अब उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, लेकिन इसके उलट उन्हें नौकरी से ही बाहर कर दिया गया।
उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर समाधान निकालने की मांग की है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस मामले में लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कर्मचारियों के आरोपों पर विश्वविद्यालय की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
वहीं, प्रभावित कर्मचारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर आगे भी आवाज उठाएंगे। उनका कहना है कि बिना नोटिस और बिना कारण बताए नौकरी से हटाना उनके साथ अन्याय है। अब सभी की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदम पर है।