लखनऊ में ट्रैफिक सुधारने को 35 हजार करोड़ की कार्ययोजना, लोक निर्माण विभाग 15 जून तक देगा रिपोर्ट
राजधानी लखनऊ में लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव और जाम की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए करीब 35 हजार करोड़ रुपये की विशाल कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इस योजना के तहत सड़क चौड़ीकरण, नए फ्लाईओवर, अंडरपास, रिंग रोड और आधुनिक ट्रैफिक सिस्टम जैसी परियोजनाओं पर काम होगा। लोक निर्माण विभाग (PWD) को 15 जून तक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
लखनऊ में बीते कुछ वर्षों में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है। शहर के प्रमुख चौराहों और व्यस्त मार्गों पर रोजाना लंबा जाम देखने को मिलता है। खासकर ऑफिस टाइम और शाम के समय लोगों को घंटों ट्रैफिक में फंसना पड़ता है। यही वजह है कि सरकार अब राजधानी के ट्रैफिक सिस्टम को पूरी तरह आधुनिक और व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ी योजना पर काम कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक इस कार्ययोजना में शहर के उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां सबसे ज्यादा ट्रैफिक दबाव रहता है। इसमें शहीद पथ, गोमती नगर, हजरतगंज, चारबाग, फैजाबाद रोड, कानपुर रोड और कुर्सी रोड जैसे प्रमुख इलाके शामिल हैं। कई स्थानों पर नए फ्लाईओवर और अंडरपास बनाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है ताकि ट्रैफिक का दबाव कम किया जा सके।
लोक निर्माण विभाग को ट्रैफिक विशेषज्ञों और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर विस्तृत खाका तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। विभाग 15 जून तक सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा, जिसके बाद परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से मंजूरी मिलने की संभावना है। योजना में स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को भी शामिल किया जा सकता है, जिससे सिग्नल संचालन और यातायात नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि आने वाले वर्षों में लखनऊ की आबादी और वाहनों की संख्या में और बढ़ोतरी होगी। ऐसे में अभी से मजबूत आधारभूत ढांचा तैयार करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से दीर्घकालिक योजना बनाई जा रही है ताकि भविष्य में ट्रैफिक जाम की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना समय पर लागू होती है तो राजधानी की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे न सिर्फ लोगों का समय बचेगा बल्कि ईंधन की खपत और प्रदूषण में भी कमी आएगी। व्यापारिक गतिविधियों और शहर की कनेक्टिविटी को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।
हालांकि इतनी बड़ी परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण, बजट और निर्माण कार्य जैसी कई चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। लेकिन सरकार का दावा है कि सभी विभागों के समन्वय से इस योजना को प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा।
फिलहाल राजधानी के लोग इस मेगा प्लान से बड़ी उम्मीद लगाए बैठे हैं। यदि 35 हजार करोड़ की यह कार्ययोजना जमीन पर उतरती है, तो आने वाले समय में लखनऊ की तस्वीर और यातायात व्यवस्था दोनों बदल सकती हैं।