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लखनऊ पुलिस लाइन में भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद बड़ा प्रशासनिक कदम, 12 पुलिसकर्मी हटाए गए

 

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस विभाग के भीतर कथित भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों के बाद बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। पुलिस लाइन में तैनात सिपाही सुनील कुमार शुक्ला द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए गणना कार्यालय में तैनात एक दारोगा और हेड कांस्टेबल सहित कुल 12 पुलिसकर्मियों को उनके वर्तमान पद से हटा दिया है।

यह मामला तब सामने आया जब सिपाही सुनील कुमार शुक्ला ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप सार्वजनिक किए। उनके आरोपों के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और मामले की आंतरिक जांच शुरू कर दी गई।

सूत्रों के अनुसार, शुरुआती जांच में कुछ संदिग्ध गतिविधियों और कार्यप्रणाली में अनियमितताओं की आशंका सामने आने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने सख्त रुख अपनाया। इसी के तहत गणना कार्यालय में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की समीक्षा की गई, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।

विभागीय आदेश के अनुसार, जिन 12 पुलिसकर्मियों को हटाया गया है, उनमें एक दारोगा और एक हेड कांस्टेबल भी शामिल हैं। इन सभी को तत्काल प्रभाव से उनके वर्तमान कार्यस्थल से हटाकर अन्यत्र संबद्ध कर दिया गया है। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं।

यह कार्रवाई पुलिस विभाग में अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे मामले की जांच अब उच्च स्तरीय टीम द्वारा की जा रही है, जो यह पता लगाएगी कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या वास्तव में विभागीय प्रक्रियाओं में कोई गड़बड़ी हुई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, इस घटना के बाद पुलिस महकमे में हलचल बढ़ गई है। विभागीय स्तर पर सभी संबंधित रिकॉर्ड और गतिविधियों की समीक्षा शुरू कर दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को समय रहते रोका जा सके।

Uttar Pradesh Police के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में किसी भी प्रकार की शिकायत को गंभीरता से लिया जाता है और निष्पक्ष जांच के बाद ही कार्रवाई की जाती है।

स्थानीय स्तर पर भी इस कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज है। कुछ लोग इसे विभाग में सुधार की दिशा में जरूरी कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

फिलहाल, जांच प्रक्रिया जारी है और पुलिस विभाग ने संकेत दिए हैं कि यदि आगे किसी भी तरह की संलिप्तता या अनियमितता सामने आती है, तो और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।