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लोहिया संस्थान की बड़ी उपलब्धि: पहली बार की-होल सर्जरी से दुर्लभ पैराथायरॉयड ट्यूमर निकाला गया, महिला को मिली नई जिंदगी

 

राजधानी स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान ने चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। संस्थान में पहली बार ट्यूमर की ‘की-होल’ सर्जरी (मिनिमली इनवेसिव सर्जरी) सफलतापूर्वक की गई, जिसमें एक महिला मरीज से दुर्लभ पैराथायरॉयड एडेनोमा को सुरक्षित रूप से निकाल दिया गया। इस सफल सर्जरी के बाद मरीज को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद जगी है।

जानकारी के अनुसार, महिला मरीज लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं। जांच में सामने आया कि उनके पैराथायरॉयड ग्रंथि में एक दुर्लभ ट्यूमर विकसित हो गया था, जिसकी वजह से शरीर में कैल्शियम का स्तर असंतुलित हो रहा था और अन्य शारीरिक परेशानियां भी बढ़ रही थीं।

डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने विस्तृत जांच और मूल्यांकन के बाद की-होल सर्जरी करने का निर्णय लिया। यह एक आधुनिक तकनीक आधारित प्रक्रिया होती है, जिसमें बड़े चीरे के बजाय छोटे छेद के माध्यम से ऑपरेशन किया जाता है। इस तकनीक से मरीज को कम दर्द, कम रक्तस्राव और तेजी से रिकवरी का लाभ मिलता है।

सर्जरी के दौरान अत्याधुनिक उपकरणों और सटीक तकनीक का उपयोग किया गया, जिससे ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाला जा सका। डॉक्टरों के अनुसार, यह ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन टीम ने इसे सुरक्षित और सफलतापूर्वक पूरा किया।

अस्पताल प्रशासन ने बताया कि यह संस्थान में पहली बार किया गया ऐसा की-होल ट्यूमर ऑपरेशन है, जो चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे भविष्य में अन्य जटिल सर्जरी के लिए भी नई राह खुलेगी।

सर्जरी के बाद महिला मरीज की हालत स्थिर है और वह तेजी से रिकवर कर रही हैं। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि वह जल्द ही सामान्य जीवन में लौट सकेंगी।

इस सफलता ने न केवल मरीज को राहत दी है, बल्कि लोहिया संस्थान को भी उन्नत सर्जिकल तकनीकों के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाई है। चिकित्सकों का कहना है कि इस तरह की तकनीक भविष्य में कई गंभीर बीमारियों के इलाज में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।