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KGMU धर्मांतरण मामला: जांच का दायरा बढ़ा, PGI तक पहुंची पड़ताल; व्हाट्सऐप ग्रुप से जुड़े थे डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ

 

लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में सामने आए धर्मांतरण के मामले की जांच का दायरा अब बढ़ता जा रहा है। मामले की पड़ताल पीजीआई (PGI) तक पहुंच गई है। जांच में सामने आया है कि व्हाट्सऐप के जरिए कई डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ और जूनियर रेजिडेंट (JR) भी आपस में जुड़े हुए थे। इनके बीच बातचीत के लिए फेसटाइम का भी इस्तेमाल किया जाता था।

जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि इस नेटवर्क से कौन-कौन लोग जुड़े थे और उनके बीच किस तरह की बातचीत होती थी। व्हाट्सऐप और फेसटाइम के जरिए संपर्क में रहने वाले लोगों की भूमिका की जानकारी जुटाई जा रही है।

व्हाट्सऐप के जरिए जुड़े थे कई लोग

जांच में पता चला है कि इस मामले से जुड़े लोगों के संपर्क का दायरा केवल KGMU तक सीमित नहीं था। इसमें डॉक्टरों के अलावा मेडिकल स्टाफ और जूनियर रेजिडेंट के जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि इनके बीच व्हाट्सऐप के माध्यम से संपर्क होता था और फेसटाइम पर भी बातचीत की जाती थी।

पीजीआई तक जांच पहुंचने के बाद मामले में जुड़े लोगों के नेटवर्क की पड़ताल महत्वपूर्ण हो गई है। जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि अलग-अलग संस्थानों में काम करने वाले लोगों के बीच किस तरह संपर्क बना हुआ था।

डिजिटल संपर्कों की भी हो रही पड़ताल

मामले में व्हाट्सऐप और फेसटाइम के इस्तेमाल की जानकारी सामने आने के बाद डिजिटल संपर्कों की जांच पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जांच में यह समझने की कोशिश की जा रही है कि संबंधित लोगों के बीच बातचीत का उद्देश्य क्या था और इस पूरे मामले में किसकी क्या भूमिका रही।

हालांकि, अभी उपलब्ध जानकारी में पीजीआई से जुड़े लोगों की संख्या, उनकी पहचान और उनकी भूमिका को लेकर विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था।

फिलहाल KGMU से शुरू हुई जांच का दायरा बढ़कर पीजीआई तक पहुंच गया है। मामले में सामने आ रहे नए संपर्कों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।