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कानपुर के स्वदेशी पैराशूटों की दुनिया में बढ़ी मांग, 12 देशों की सेनाएं हुईं प्रभावित

 

उत्तर प्रदेश के Kanpur में तैयार किए जा रहे स्वदेशी सैन्य पैराशूट अब वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहे हैं। अत्याधुनिक तकनीक से निर्मित इन पैराशूटों ने कई देशों की सेनाओं का ध्यान आकर्षित किया है, जिससे भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता को नई मजबूती मिली है।

12 देशों की सेनाओं ने दिखाई रुचि

जानकारी के अनुसार, कानपुर स्थित आयुध पैराशूट निर्माण इकाई (ओपीएफ) द्वारा तैयार किए गए सैन्य पैराशूटों की गुणवत्ता और प्रदर्शन से 12 देशों की सेनाएं प्रभावित हुई हैं। विदेशी सैन्य अधिकारियों ने इन उत्पादों को अपनी रक्षा प्रणालियों में शामिल करने की इच्छा जताई है।

सुखोई-30 के ब्रेक पैराशूट बने आकर्षण का केंद्र

स्वदेशी तकनीक से निर्मित सुखोई-30 लड़ाकू विमान के ब्रेक पैराशूट को विशेष सराहना मिल रही है। यह पैराशूट विमान की लैंडिंग के दौरान उसकी गति को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसकी विश्वसनीयता ने विदेशी विशेषज्ञों को प्रभावित किया है।

आधुनिक सैन्य जरूरतों के अनुरूप तकनीक

ओपीएफ द्वारा विकसित पैराशूट आधुनिक युद्ध और सैन्य अभियानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। इनमें सैनिकों, सैन्य उपकरणों और विमानों के लिए विभिन्न प्रकार के विशेष पैराशूट शामिल हैं।

‘मेक इन इंडिया’ को मिल रही मजबूती

कानपुर में निर्मित इन उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती मांग को ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है। इससे भारतीय रक्षा उद्योग को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

निर्यात के नए अवसर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विदेशी सेनाओं से औपचारिक ऑर्डर प्राप्त होते हैं तो इससे रक्षा निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। साथ ही भारत की रक्षा निर्माण क्षमता और तकनीकी दक्षता को भी वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी।

स्वदेशी सैन्य उपकरणों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता यह दर्शाती है कि भारत अब रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में केवल आत्मनिर्भर ही नहीं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।