जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य ने शंकराचार्य पर लगाए बाल यौन उत्पीड़न का आरोप, फुटेज में देखें अविमुक्तेश्वरानंद बोले मुझ पर प्रहार किया जा रहा
जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर बच्चों के यौन शोषण का गंभीर आरोप लगाया है। आशुतोष ब्रह्मचारी ने यह आरोप 8 फरवरी को प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में वाद (शिकायत) दायर करके लगाए।
आरोप के अनुसार, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर और गुरुकुल में बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न किया गया। शिकायत में कहा गया कि गुरुकुल की आड़ में यह अपराध किया जा रहा है। अपने दावे की पुष्टि के लिए आशुतोष ब्रह्मचारी ने दो बच्चों को भी कोर्ट में पेश किया।
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह आरोप अत्यंत घिनौने और कल्पना से परे हैं। उन्होंने कहा कि जब से उन्होंने गौ माता की रक्षा और धार्मिक कार्यों के लिए आवाज उठाई है, तब से उन्हें कई लोग और कुछ सरकारी अधिकारी पसंद नहीं कर रहे हैं। शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि पहले उन्हें अपमानित किया गया, उनके अनुयायियों को धमकाया गया और मारपीट भी की गई।
शंकराचार्य ने कोर्ट में अपने पक्ष में कहा, “ऐसे आरोप जो सभ्य समाज की कल्पना से परे हैं, लगाये गए हैं, लेकिन सत्य को कभी आंच नहीं आती। हमने कोर्ट में सारे साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं। सत्य की रक्षा के लिए पूरी प्रक्रिया में सहयोग करेंगे।”
विशेषज्ञों और कानूनी जानकारों का कहना है कि इस प्रकार के मामले समाज में व्यापक संवेदनशीलता पैदा करते हैं। बाल यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच स्पेशल पॉक्सो कोर्ट के तहत त्वरित और गंभीर रूप से की जाती है। इसमें बच्चों की सुरक्षा, मानसिक और शारीरिक कल्याण सर्वोपरि माना जाता है।
मामले में दोनों पक्षों के बयान सामने आने के बाद प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस और विशेष जांच अधिकारी (एसआईटी) घटनास्थल, शिविर और गुरुकुल से साक्ष्य और गवाह जुटा रहे हैं। कोर्ट ने भी बच्चे और उनके परिवार की सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध किए हैं।
धार्मिक और समाजिक विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में आरोप और जवाब दोनों पक्षों के प्रमाणों पर निर्भर होते हैं। न्याय प्रक्रिया को प्रभावित किए बिना आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
इस घटना ने धार्मिक समुदाय और आम समाज में बहस को जन्म दिया है। कुछ लोग आशुतोष ब्रह्मचारी के आरोपों को गंभीर मान रहे हैं, वहीं कुछ शंकराचार्य के पक्ष में कह रहे हैं कि यह आरोप उनकी प्रतिष्ठा और कार्यों को प्रभावित करने की कोशिश है।
कोर्ट ने मामले की सुनवाई की तारीखों का निर्धारण कर दिया है। जांच पूरी होने तक शंकराचार्य और शिकायतकर्ता दोनों पक्षों के सुरक्षा और बच्चों की मानसिक सुरक्षा पर विशेष ध्यान रखा जाएगा।
यह मामला अब प्रयागराज और पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। बाल यौन उत्पीड़न के आरोप और धार्मिक संस्थानों में इसकी जांच को लेकर आम जनता, मीडिया और सामाजिक संगठन गहराई से निगरानी रख रहे हैं।