यूपी की 5 रामलीलाओं के रावणों का इंटरव्यू: बोले- गद्दारी करके भी विभीषण हीरो बन गया, लोग मुझे मारने दौड़ते हैं
उत्तर प्रदेश में दशहरे के मौके पर रामलीलाओं की धूम है। कहीं भगवान राम की विजय का मंचन हो रहा है, तो कहीं रावण दहन की तैयारियां चल रही हैं। रामलीला में रावण का किरदार निभाने वाले कलाकारों के लिए यह अनुभव भी खास होता है। मंच पर उन्हें बुराई का प्रतीक माना जाता है, लेकिन पर्दे के पीछे उनकी अपनी कहानियां और अनुभव हैं।
यूपी की पांच रामलीलाओं में रावण का किरदार निभाने वाले कलाकारों के इंटरव्यू में उनके अनुभवों से जुड़ी कई दिलचस्प बातें सामने आईं। कलाकारों ने बताया कि मंच पर रावण बनते ही दर्शकों का व्यवहार बदल जाता है। कहीं लोग उनके अभिनय की तारीफ करते हैं, तो कहीं रावण के किरदार के प्रति गुस्सा भी दिखाते हैं।
‘गद्दारी करके भी विभीषण हीरो बन गया’
रावण का किरदार निभाने वाले कलाकारों की सबसे दिलचस्प शिकायत विभीषण को लेकर है। रामायण में विभीषण रावण का भाई था, जिसने रावण का साथ छोड़कर भगवान राम का पक्ष लिया था। राम की विजय में विभीषण की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है।
रावण का अभिनय करने वाले कलाकारों के नजरिए से देखें तो यह प्रसंग मजाकिया अंदाज में सामने आता है। उनका कहना है कि विभीषण को राम का सहयोगी बनने के कारण सम्मान मिलता है, जबकि रावण का किरदार निभाने वालों को मंच पर बुराई का प्रतीक बनकर पेश होना पड़ता है।
हालांकि, यह कलाकारों की भूमिका से जुड़ी हास्यपूर्ण टिप्पणी है। रामायण की अलग-अलग परंपराओं में विभीषण के निर्णय को धर्म का साथ देने और अधर्म का विरोध करने के रूप में भी देखा जाता है।
रावण बनते ही बदल जाता है लोगों का व्यवहार
कलाकारों के मुताबिक, रावण का किरदार निभाना केवल भारी पोशाक पहनने और संवाद बोलने तक सीमित नहीं है। इसके लिए आवाज, हाव-भाव, अभिनय और मंच पर प्रभावशाली उपस्थिति की जरूरत होती है। रावण के लंबे संवाद और उसके व्यक्तित्व को दिखाने के लिए कलाकारों को खास तैयारी करनी पड़ती है।
रावण के किरदार से जुड़ी एक और दिलचस्प बात यह है कि दर्शक कई बार मंच पर निभाए जा रहे पात्र और असल कलाकार के बीच अंतर भूल जाते हैं। इसी वजह से कलाकार ने कहा कि लोग उन्हें देखकर मारने के लिए दौड़ते हैं। यह अनुभव रावण के किरदार के प्रति दर्शकों की भावनात्मक प्रतिक्रिया को दर्शाता है।
मंच पर खलनायक, असल जिंदगी में कलाकार
रामलीला में रावण को आम तौर पर अहंकार और अधर्म के प्रतीक के रूप में दिखाया जाता है। लेकिन इस भूमिका को निभाने वाले कलाकार अपनी कला के जरिए धार्मिक कथा को जीवंत बनाते हैं। उनके अभिनय के बिना रामलीला का युद्ध और रावण वध वाला प्रसंग प्रभावशाली नहीं बन पाता।
रावण की भूमिका निभाने के दौरान कलाकारों को संवाद याद रखने, पोशाक संभालने और दर्शकों के सामने दमदार अभिनय करने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। कई जगह रावण का पुतला दहन दशहरे के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होता है।
दशहरे पर रावण के किरदार की खास अहमियत
दशहरा भगवान राम की रावण पर विजय का प्रतीक है। रामलीला के जरिए यह कथा पीढ़ियों से लोगों तक पहुंचाई जाती रही है। रावण की भूमिका निभाने वाले कलाकार इस परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। मंच पर भले ही उनका किरदार हार जाता हो, लेकिन उनके अभिनय के बिना कथा का सबसे चर्चित प्रसंग अधूरा रह जाएगा।
यूपी की पांच रामलीलाओं के रावणों के अनुभव यह बताते हैं कि किसी किरदार को निभाना और वास्तविक जीवन में वैसा होना दो अलग बातें हैं। मंच पर रावण बनने वाले कलाकार भी अपनी कला, मेहनत और अनुभव के जरिए दर्शकों का मनोरंजन करते हैं।