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राम मंदिर ट्रस्ट में इस्तीफों के पीछे बढ़ा दबाव? वीडियो में देंखे हरिद्वार बैठक से अयोध्या तक चली घटनाओं पर चर्चाएं तेज

 

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे को लेकर नई चर्चाएं सामने आई हैं। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि इन इस्तीफों की पृष्ठभूमि हरिद्वार में हुई विश्व हिंदू परिषद की बैठक में तैयार हुई, जहां कथित तौर पर राम मंदिर चढ़ावा प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए गए थे। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हुए इस्तीफों के बाद घटनाक्रम को लेकर सियासी और धार्मिक हलकों में चर्चाओं का दौर जारी है। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा बढ़ते दबाव के बीच दिया। हालांकि, ट्रस्ट या संबंधित संगठनों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।.

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सूत्रों के मुताबिक, 18 और 19 जून को हरिद्वार में विश्व हिंदू परिषद की बैठक आयोजित हुई थी, जिसमें अयोध्या से चंपत राय और मंदिर निर्माण से जुड़े गोपाल राव भी शामिल हुए थे। दावा किया जा रहा है कि बैठक के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने राम मंदिर के चढ़ावे के प्रबंधन और हिसाब-किताब को लेकर जानकारी ली।सूत्रों का यह भी कहना है कि चढ़ावे के लेखा-जोखा में कथित अनियमितताओं को लेकर बैठक में नाराजगी जताई गई और संबंधित पदाधिकारियों से जवाब मांगा गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या विश्व हिंदू परिषद की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।

बताया जा रहा है कि हरिद्वार बैठक के बाद चंपत राय पर संगठनात्मक दबाव बढ़ने लगा। इसी बीच 19 जून को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या दौरे पर पहुंचे। सूत्रों के अनुसार, उस दौरान चंपत राय मुख्यमंत्री के सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर नहीं आए, जिससे उनके भविष्य को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया।इन घटनाक्रमों के बाद शुक्रवार को चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपना इस्तीफा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को सौंप दिया। इससे पहले मंदिर निर्माण से जुड़े गोपाल राव को भी मंदिर की व्यवस्थाओं से अलग किए जाने की चर्चा सामने आई थी, हालांकि इस संबंध में भी आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है।

उल्लेखनीय है कि राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े कथित गड़बड़ी के मामले में जांच की प्रक्रिया पहले से चर्चा में है। इसी बीच ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफों ने पूरे घटनाक्रम को और अधिक सुर्खियों में ला दिया है।फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इस्तीफे स्वीकार किए गए हैं या नहीं और ट्रस्ट के पुनर्गठन को लेकर क्या निर्णय लिया जाएगा। मामले से जुड़े कई दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। ऐसे में जांच रिपोर्ट और ट्रस्ट की ओर से जारी होने वाले आधिकारिक बयान के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।