आगरा में जिंदा बेटी का परिजनों ने कराया शांति पाठ, प्रेमी के साथ रहने के फैसले से थे नाराज; फोटो पर चढ़ाई माला
उत्तर प्रदेश के आगरा से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां प्रेमी के साथ रहने का फैसला करने वाली एक युवती से नाराज परिजनों ने उसके जीवित रहते ही शांति पाठ करा दिया। परिवार ने बाकायदा शोक कार्ड छपवाकर लोगों को आमंत्रित किया और युवती की तस्वीर पर माला चढ़ाई। इस घटना की चर्चा इलाके में हो रही है। मामला परिवार की नाराजगी और युवती के अपने जीवनसाथी को चुनने के फैसले से जुड़ा है।
प्रेमी के साथ घर छोड़कर चली गई थी युवती
जानकारी के मुताबिक, युवती उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के सिढ़पुरा क्षेत्र से जुड़ी बताई जा रही है। युवती अपने प्रेमी के साथ रहने का फैसला करते हुए घर छोड़कर चली गई थी। उसके इस कदम से परिजन नाराज हो गए। परिवार के लोग युवती के फैसले से सहमत नहीं थे और उन्होंने इसे अपनी प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा।
युवती के घर छोड़ने के बाद मामला पुलिस तक पहुंच गया। परिजनों की ओर से पुलिस से संपर्क किए जाने के बाद पुलिस ने युवती को बरामद कर लिया। हालांकि, पुलिस की कार्रवाई के बाद मामला कानूनी प्रक्रिया तक पहुंच गया।
बालिग होने के कारण न्यायालय ने दिया युवती को फैसला लेने का अधिकार
पुलिस द्वारा बरामद किए जाने के बाद युवती को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। बताया जा रहा है कि युवती बालिग थी। ऐसे मामलों में कानून के तहत बालिग व्यक्ति को अपनी मर्जी से जीवन जीने और संबंधों के बारे में निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त है।
न्यायालय ने युवती की स्थिति और उसकी इच्छा को ध्यान में रखते हुए उसे उसके प्रेमी के साथ भेज दिया। इस फैसले के बाद युवती के परिजनों की नाराजगी और बढ़ गई। परिवार युवती के प्रेम संबंध को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था।
शोक कार्ड छपवाकर कराया शांति पाठ
युवती के प्रेमी के साथ रहने के फैसले से नाराज परिजनों ने ऐसा कदम उठाया, जिसने लोगों को हैरान कर दिया। परिवार ने युवती को जीवित रहते हुए ही मृत मानकर शांति पाठ का आयोजन किया। इसके लिए शोक कार्ड छपवाए गए और लोगों को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बुलाया गया।
इतना ही नहीं, युवती की तस्वीर पर माला भी चढ़ाई गई। परिजनों के इस कदम को युवती के फैसले के प्रति उनकी नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है। घटना ने परिवार और संतान के बीच रिश्तों, सामाजिक मान्यताओं तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर चर्चा को जन्म दिया है।
व्यक्तिगत फैसले और पारिवारिक रिश्तों पर सवाल
यह मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि बालिग युवाओं के अपने जीवनसाथी को चुनने के अधिकार और परिवार की अपेक्षाओं के बीच टकराव की स्थिति में क्या किया जाना चाहिए। कानून बालिग व्यक्ति को अपनी पसंद से जीवन जीने का अधिकार देता है, जबकि कई परिवार सामाजिक दबाव और पारंपरिक मान्यताओं के चलते ऐसे फैसलों को स्वीकार नहीं कर पाते।
फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, युवती को न्यायालय के आदेश पर उसके प्रेमी के साथ भेजा गया था। वहीं, परिजनों द्वारा शांति पाठ कराने की घटना इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।