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आज रावण चुनाव लड़ता तो जनता को सुख-समृद्धि देता: आगरा की रामलीला में पवन 12 साल से निभा रहे किरदार, पढ़िए क्यों बने दशानन

 

उत्तर प्रदेश के आगरा में रामलीला के मंच पर रावण का किरदार निभाने वाले पवन पिछले 12 साल से दशानन की भूमिका निभा रहे हैं। उनके लिए रावण का किरदार सिर्फ एक नकारात्मक पात्र निभाना नहीं, बल्कि रामायण के एक जटिल चरित्र को मंच पर जीवंत करना है। पवन का कहना है कि रावण विद्वान था और उसके व्यक्तित्व के कई पहलू थे। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर आज रावण चुनाव लड़ता, तो वह जनता को सुख-समृद्धि देता।

पवन का यह बयान रामलीला में रावण के किरदार को लेकर एक अलग नजरिया सामने लाता है। आमतौर पर दशहरे पर रावण को बुराई और अहंकार का प्रतीक मानकर उसका पुतला जलाया जाता है, लेकिन रामायण में रावण की विद्वता, शिवभक्ति और उसके व्यक्तित्व के दूसरे पहलुओं का भी वर्णन मिलता है।

12 साल से निभा रहे हैं दशानन का किरदार

आगरा की रामलीला में पवन लगातार 12 वर्षों से रावण की भूमिका निभा रहे हैं। इतने लंबे समय तक एक ही किरदार निभाने के दौरान उन्होंने उसके संवाद, हाव-भाव और मंच पर व्यक्तित्व को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने का अनुभव हासिल किया है।

रावण का किरदार निभाने के लिए कलाकार को प्रभावशाली आवाज, दमदार संवाद अदायगी और खास अभिनय शैली की जरूरत होती है। रावण के क्रोध, अहंकार, विद्वता और राजसी व्यक्तित्व को मंच पर दिखाना इस भूमिका की बड़ी चुनौती मानी जाती है।

‘आज रावण चुनाव लड़ता तो जनता को सुख-समृद्धि देता’

पवन ने रावण को लेकर राजनीतिक अंदाज में टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर आज रावण चुनाव लड़ता, तो जनता को सुख-समृद्धि देता। उनका यह बयान रावण के चरित्र को लेकर एक व्यंग्यात्मक टिप्पणी के रूप में देखा जा सकता है।

हालांकि, रामायण में रावण के शासन और व्यक्तित्व को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं मिलती हैं। उसे एक ओर विद्वान और शिवभक्त बताया गया है, तो दूसरी ओर सीता हरण और अहंकार के कारण उसका अंत भगवान राम के हाथों हुआ। रामलीला में इसी कथा के जरिए धर्म और अधर्म के बीच संघर्ष को दर्शाया जाता है।

आखिर पवन ने रावण का किरदार क्यों चुना?

रावण का किरदार निभाने के पीछे कलाकारों के लिए अभिनय की चुनौती और मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर भी महत्वपूर्ण होता है। इस भूमिका में कलाकार को एक ऐसे पात्र को जीवंत करना पड़ता है, जिसके व्यक्तित्व में विद्वता, शक्ति, अहंकार और नाटकीयता जैसे कई पहलू शामिल हैं।

पवन पिछले 12 साल से इस भूमिका के जरिए दर्शकों के सामने रावण के चरित्र को प्रस्तुत कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने शुरुआत में यह किरदार क्यों चुना और इसके पीछे उनकी व्यक्तिगत प्रेरणा क्या थी, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।

दशहरे पर रावण के किरदार की खास भूमिका

दशहरा भगवान राम की रावण पर विजय का प्रतीक है। देशभर में रामलीलाओं के मंचन के बाद रावण दहन किया जाता है। आगरा की रामलीला में पवन जैसे कलाकार इस परंपरा को जीवंत बनाए रखने में योगदान देते हैं।

रावण का किरदार निभाने वाले कलाकार भले ही मंच पर अंत में हार जाते हों, लेकिन उनके अभिनय के बिना रामलीला का सबसे चर्चित प्रसंग अधूरा रहता है। पवन की 12 साल की यात्रा इस बात को दर्शाती है कि मंच पर किसी किरदार को निभाने के लिए निरंतर अभ्यास, अनुभव और अभिनय के प्रति समर्पण जरूरी है।