IAS दिव्या मित्तल का इस्तीफा: देवरिया में भी खूब चर्चित रही थी उनकी कार्यशैली, धूप में निरीक्षण से लेकर दो टूक अंदाज तक
उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के इस्तीफे की खबर ने प्रशासनिक गलियारों से लेकर उन जिलों तक हलचल मचा दी है, जहां उन्होंने अपनी सेवाएं दी थीं। करीब 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को इस्तीफा देने की जानकारी सार्वजनिक की। इस्तीफे से पहले वह उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात थीं।
दिव्या मित्तल का नाम उन अधिकारियों में लिया जाता है, जिन्होंने फील्ड पोस्टिंग के दौरान अपनी अलग कार्यशैली से पहचान बनाई। उन्होंने संतकबीरनगर, मिर्जापुर और देवरिया समेत कई जिलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। देवरिया में उन्होंने करीब दो साल तक जिलाधिकारी के रूप में काम किया। 13 जुलाई 2024 को उन्हें देवरिया का डीएम बनाया गया था और 6 मई 2026 को उन्हें राजस्व विभाग में विशेष सचिव की जिम्मेदारी दी गई।
देवरिया में चर्चा में रही कार्यशैली
देवरिया में डीएम रहते हुए दिव्या मित्तल की कार्यशैली को लेकर स्थानीय स्तर पर काफी चर्चा रही। रिपोर्टों के मुताबिक, वह फील्ड में जाकर अधिकारियों और कर्मचारियों से सीधे संवाद करने के लिए जानी जाती थीं। आम लोगों की समस्याओं को मौके पर सुनने और अधिकारियों को जवाबदेह बनाने के उनके अंदाज की भी चर्चा होती रही।
उनकी कार्यशैली का एक चर्चित किस्सा बाढ़ प्रभावित इलाकों के निरीक्षण से जुड़ा है। बताया जाता है कि रुद्रपुर और बरहज क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के दौरान उन्होंने तेज धूप में भी मौके पर रहकर हालात देखे। इसी दौरान उनका एक कथित जवाब सोशल मीडिया पर चर्चा में आया था—“धूप ही तो है, पिघल थोड़े जाएंगे।” यह वाकया उनके फील्ड में सक्रिय रहने वाले अंदाज के उदाहरण के तौर पर बताया जाता है।
जनता से सीधे संवाद के लिए भी रहीं चर्चित
दिव्या मित्तल की पहचान सिर्फ प्रशासनिक बैठकों तक सीमित रहने वाली अधिकारी की नहीं रही। उनके कार्यकाल के दौरान जनता से सीधे संवाद और स्थानीय समस्याओं को समझने के प्रयासों की भी चर्चा हुई। यही वजह है कि उनके तबादले और अब इस्तीफे की खबर पर देवरिया के साथ-साथ उनके पुराने कार्यक्षेत्रों में भी लोगों की प्रतिक्रिया सामने आ रही है।
मिर्जापुर में भी उनका कार्यकाल काफी चर्चित रहा था। वहां उनके कार्यकाल से जुड़ा सबसे प्रमुख उदाहरण लहुरियादह गांव में पेयजल पहुंचाने की पहल का है। रिपोर्टों के अनुसार, लंबे समय से पाइपलाइन से पानी की सुविधा से वंचित गांव के घरों तक नल से पानी पहुंचाने की व्यवस्था की गई थी। इस काम के लिए स्थानीय स्तर पर उन्हें काफी सराहना मिली।
इस्तीफे की वजह पर कई चर्चाएं
दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद इसके कारण को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि फील्ड पोस्टिंग से हटाकर शासन में जिम्मेदारी दिए जाने से वह असंतुष्ट थीं। हालांकि, दिव्या मित्तल ने अपने इस्तीफे की सार्वजनिक घोषणा में किसी एक कारण को स्पष्ट रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया है। इसलिए इस्तीफे को किसी विशेष विवाद या घटना से जोड़कर देखना फिलहाल उचित नहीं होगा।
उन्होंने अपने विदाई संदेश में अपने 13 साल के प्रशासनिक सफर को याद किया और जनता के बीच काम करने के अनुभवों को महत्वपूर्ण बताया। उनके इस्तीफे के बाद यह भी चर्चा है कि आगे वह क्या करेंगी। हालांकि, सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने फिलहाल अपने भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट निर्णय सार्वजनिक नहीं किया है।
दिव्या मित्तल का इस्तीफा ऐसे समय में सामने आया है जब उनके फील्ड कार्यकाल और काम करने के अंदाज को लेकर सोशल मीडिया पर पुराने किस्से फिर चर्चा में हैं। देवरिया से लेकर मिर्जापुर तक उनके काम से जुड़े अनुभवों को लोग याद कर रहे हैं। करीब 13 साल की सेवा के बाद प्रशासनिक पद छोड़ने का उनका फैसला निश्चित तौर पर उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में चर्चा का विषय बना हुआ है।