ग्रेटर नोएडा सड़क हादसा, रेस्क्यू ऑपरेशन बना चुनौती, 70 फीट दूर पानी में डूबी कार तक पहुंचने में जूझती रही पुलिस
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में हुए भीषण सड़क हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य में जुटी पुलिस तथा रेस्क्यू टीम को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। हादसे के बाद जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो स्थिति अनुमान से कहीं अधिक जटिल निकली। दुर्घटनाग्रस्त कार सड़क से लगभग 70 फीट दूर गहरे पानी में डूबी हुई मिली, जिससे बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बन गया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कार के पानी में गिरने की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस, फायर ब्रिगेड और अन्य राहत दल मौके पर पहुंचे। कार को बाहर निकालने के लिए तत्काल क्रेन मंगवाई गई, लेकिन तकनीकी सीमाओं के कारण वह क्रेन केवल 40 फीट तक ही पहुंच पा रही थी। ऐसे में सड़क से काफी दूर पानी में फंसी कार तक पहुंचना संभव नहीं हो सका।
घटनास्थल के चारों ओर घनी झाड़ियां और दलदली इलाका होने के कारण बचाव कार्य और भी मुश्किल हो गया। राहत दल ने नाव के जरिए रेस्क्यू की संभावना भी तलाशी, लेकिन पानी के चारों ओर सुरक्षित तरीके से बोट उतारने की कोई जगह नहीं मिल सकी। गहरे पानी और असमतल जमीन ने राहत कार्य को लगभग ठप कर दिया।
स्थिति को और गंभीर बना दिया मौसम ने। हादसे के समय इलाके में घना कोहरा और अंधेरा छाया हुआ था, जिससे दृश्यता बेहद कम हो गई। पुलिस और राहतकर्मियों को हाथ में टॉर्च और सीमित रोशनी के सहारे काम करना पड़ा। कम दृश्यता के कारण कार की सही स्थिति का अंदाजा लगाने और उपकरणों को सही जगह पर पहुंचाने में काफी समय लगा।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि संसाधनों की कमी और तकनीकी दिक्कतों के चलते रेस्क्यू ऑपरेशन में लगातार देरी होती रही। देर रात तक कोशिशों के बावजूद कार को पानी से बाहर नहीं निकाला जा सका। इसके बाद उच्च अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया गया और बड़े व आधुनिक संसाधन मंगवाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
स्थानीय लोगों ने भी राहत कार्य में आ रही दिक्कतों को करीब से देखा। उनका कहना है कि यह इलाका पहले से ही दुर्घटनाओं के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है, लेकिन सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त नहीं हैं। सड़क किनारे गहरे गड्ढे और पानी से भरे इलाके हादसों की आशंका को और बढ़ा देते हैं।
पुलिस ने बताया कि अगली सुबह बेहतर रोशनी और अतिरिक्त संसाधनों के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन दोबारा शुरू किया जाएगा। साथ ही, हादसे के कारणों की भी जांच की जा रही है कि कार इतनी दूर जाकर पानी में कैसे गिरी।
यह घटना न सिर्फ सड़क सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में आधुनिक संसाधनों और बेहतर तैयारी की जरूरत को भी उजागर करती है। ग्रेटर नोएडा जैसे विकसित क्षेत्र में इस तरह की तकनीकी असहायता प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक बड़ी चेतावनी मानी जा रही है।