ग्रेटर नोएडा: फर्जी जज‑पुलिस के दुष्प्रयोग से बुज़ुर्ग के साथ 20 दिनों तक डर, 1.30 करोड़ रुपये की ठगी
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश) में साइबर क्राइम के खतरनाक रूप डिजिटल अरेस्ट की एक और गंभीर ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें 72 वर्षीय एक बुज़ुर्ग व्यक्ति से लगभग ₹1.30 करोड़ से अधिक की रकम ठगों ने निकाल ली। यह घटना सुर्खियों में तब आई जब पीड़ित ने अपने साथ हुई ठगी की शिकायत सेक्टर‑36 साइबर थाना में 12 मार्च को दर्ज कराई।
ठगी का तरीका — डिजिटल अरेस्ट का जाल
पीड़ित दिलीप कुमार दास, जो ग्रेटर नोएडा‑सूरजपुर के निवासी हैं, उन्होंने बताया कि 6 फरवरी को उन्हें एक अनजान मोबाइल नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताया और कहा कि उनके नाम से जारी एक सिम कार्ड का इस्तेमाल कथित गैरकानूनी गतिविधियों में हो रहा है।
इसके बाद ठगों ने वीडियो कॉल के ज़रिए उन्हें एक नकली कोर्ट रूम दिखाया। वीडियो कॉल में एक व्यक्ति ने खुद को जज बताया और दूसरे ने पुलिस अधिकारी की वर्दी पहनी थी। इस नकली साजिश के ज़रिए उन्हें भरोसा दिलाया गया कि उनके खिलाफ गंभीर मामला दर्ज है और वे डिजिटल अरेस्ट में हैं, इसलिए उन्हें जांच में सहयोग करना होगा।
20 दिनों तक डराते रहे ठग, करवाए पैसे ट्रांसफर
ठगों का धैर्य और चालाकी यही थी कि उन्होंने दिलीप से लगभग 20 दिनों तक लगातार बातचीत और दबाव जारी रखा। उन्होंने दावा किया कि बैंक खातों की जांच होगी और जांच पूरी होने पर सारी रकम वापस कर दी जायेगी। डर और दबाव में आए दिलीप ने फर्जी संतुष्टि के नाम पर कई बार अलग‑अलग खातों में पैसे ट्रांसफर कर दिए।
ठगी के क्रम में ट्रांसफर किए गए प्रमुख रकम इस प्रकार हैं:
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13 फरवरी को लगभग ₹51.95 लाख
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19 फरवरी को ₹48.95 लाख
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21 फरवरी को ₹10.95 लाख
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25 फरवरी को ₹17.20 लाख
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26 फरवरी को ₹56,962
इन ट्रांसफरों के बाद कुल लगभग ₹1,29,61,962 पीड़ित के खातों से निकाले गए।
फर्जी दस्तावेज और आश्वासन
पैसे ट्रांसफर होने के बाद भी ठगों ने पीड़ित को विश्वास में रखने के लिए फर्जी दस्तावेज भेजे। उनमें सुप्रीम कोर्ट और मुंबई पुलिस के नाम से लिखे पत्र शामिल थे, जिसमें दावा किया गया कि उन्हें नोड्यूज़ सर्टिफिकेट मिल चुका है और जल्दी ही सारी रकम वापस कर दी जायेगी। इन झूठे आश्वासनों के कारण दिलीप ने देर तक ठगी का अहसास नहीं किया।
शिकायत के बाद पुलिस ने शुरू की जांच
जब कोई पैसा वापस नहीं आया और संदिग्ध गतिविधि का एहसास हुआ, तब दिलीप ने साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में ठगी (Cheating), धमकी और डिजिटल अरेस्ट का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साइबर सेल की डीसीपी शैव्या गोयल ने बताया कि ठग वीडियो कॉल, फर्जी पहचान और मानसिक दबाव का उपयोग कर क्रिमिनल स्कैम को अंजाम देते हैं।
जानें ‘डिजिटल अरेस्ट’ क्या है?
डिजिटल अरेस्ट एक प्रकार की साइबर ठगी है, जिसमें अपराधी खुद को सरकारी अधिकारी, पुलिस या कोर्ट का प्रतिनिधि बता कर पीड़ित को डिजिटल यानी ऑनलाइन “गिरफ्तार” या जांच का शिकार बताते हैं और डराकर पैसे या बैंक जानकारी निकाल लेते हैं। यह एक ठगी का रूप है जिसका कोई कानूनी आधार नहीं होता।
पुलिस की अपील
साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान नंबर से फोन, वीडियो कॉल या अधिकारी होने का दावा करने वाले व्यक्ति पर बिना जांच भरोसा ना करें। किसी भी तरह का दबाव बनाकर पैसे ट्रांसफर करने की बात करने पर तुरंत साइबर सेल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना दें।