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पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर बढ़ा हादसों का ग्राफ, 7 महीने में 65 दुर्घटनाएं; 83 लोगों की मौत

 

उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर सड़क हादसों का ग्राफ तेजी से बढ़ता जा रहा है। पिछले सात महीनों में एक्सप्रेसवे पर 65 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 83 लोगों की जान चली गई। आंकड़ों ने एक्सप्रेसवे पर बढ़ती सड़क सुरक्षा संबंधी चिंताओं को उजागर किया है। सबसे गंभीर बात यह है कि पिछले एक साल की तुलना में हादसों की संख्या में 75.68 फीसदी, जबकि सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या में 137.14 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहरों और क्षेत्रों को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग के तौर पर देखा जाता है। इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों की आवाजाही बढ़ने के साथ सड़क हादसों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है। तेज रफ्तार, वाहन चालकों की लापरवाही और लंबी दूरी तक लगातार ड्राइविंग को हादसों की प्रमुख वजहों में माना जा रहा है।

सात महीने में 65 हादसे, 83 मौतें

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस साल के शुरुआती सात महीनों में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर कुल 65 दुर्घटनाएं हुईं। इन हादसों में 83 लोगों की मौत हो गई। यानी औसतन लगभग हर हादसे में एक से अधिक लोगों की जान गई।

दुर्घटनाओं में कई मामलों में वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए। एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में वाहन चालकों और यात्रियों को गंभीर चोटें आने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं।

एक साल में 75 फीसदी से ज्यादा बढ़े हादसे

आंकड़ों की तुलना करें तो एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाओं की स्थिति तेजी से खराब हुई है। एक साल के भीतर सड़क हादसों की संख्या में 75.68 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, इन हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या में 137.14 फीसदी का इजाफा हुआ है।

मौतों में हुई यह बढ़ोतरी विशेष चिंता का विषय है। इसका मतलब है कि दुर्घटनाएं बढ़ने के साथ-साथ उनके घातक होने का अनुपात भी बढ़ा है। ऐसे में एक्सप्रेसवे पर यातायात नियमों के पालन और सड़क सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है।

तेज रफ्तार बनी बड़ी वजह

एक्सप्रेसवे पर हादसों के पीछे तेज रफ्तार को प्रमुख कारण माना जाता है। एक्सप्रेसवे पर वाहन अपेक्षाकृत अधिक गति से चलते हैं। कई बार चालक निर्धारित गति सीमा का पालन नहीं करते। अचानक लेन बदलना, गलत तरीके से ओवरटेक करना और वाहन चलाते समय ध्यान भटकना भी दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है।

लंबी दूरी तय करने वाले वाहन चालकों में थकान और नींद भी गंभीर जोखिम पैदा करती है। ऐसे में नियमित अंतराल पर ब्रेक लेने और वाहन चलाते समय पर्याप्त सावधानी बरतना जरूरी है।

सड़क सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

लगातार बढ़ रहे हादसों ने एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, हादसों को कम करने के लिए स्पीड मॉनिटरिंग, पेट्रोलिंग, सीसीटीवी निगरानी और जागरूकता अभियान को और प्रभावी बनाने की जरूरत है।

इसके साथ ही वाहन चालकों को यातायात नियमों का पालन करने और निर्धारित गति सीमा के भीतर वाहन चलाने के लिए लगातार जागरूक किया जाना जरूरी है।

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर महज सात महीनों में 83 लोगों की मौत का आंकड़ा बताता है कि सड़क सुरक्षा को लेकर तत्काल प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। आने वाले समय में हादसों पर नियंत्रण के लिए प्रशासन और एक्सप्रेसवे प्रबंधन की ओर से उठाए जाने वाले कदम बेहद महत्वपूर्ण होंगे।