रेलवे ट्रैक की मजबूती जांचेगा GPR सिस्टम: उत्तर मध्य रेलवे खर्च करेगा 26.91 करोड़ रुपये, बिना गिट्टी हटाए मिलेगी अंदरूनी जानकारी
उत्तर मध्य रेलवे (North Central Railway) अब आधुनिक तकनीक की मदद से रेलवे ट्रैक की अंदरूनी स्थिति की जांच करेगा। इसके लिए रेलवे प्रशासन ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) तकनीक का इस्तेमाल करने जा रहा है। इस परियोजना पर करीब 26.91 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस तकनीक से ट्रैक के नीचे की परतों और बैलास्ट बेड की स्थिति का पता लगाया जा सकेगा, जिससे रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा।
ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार एक आधुनिक जांच प्रणाली है, जिसमें जमीन के अंदर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें भेजी जाती हैं। इन तरंगों की मदद से ट्रैक के नीचे मौजूद अलग-अलग परतों की जानकारी जुटाई जाती है। इससे यह पता लगाया जा सकता है कि रेलवे लाइन के नीचे की मिट्टी, गिट्टी और अन्य संरचनाएं कितनी मजबूत स्थिति में हैं।
रेलवे ट्रैक की मजबूती में बैलास्ट बेड यानी पटरियों के नीचे बिछाई जाने वाली गिट्टी की अहम भूमिका होती है। समय के साथ गिट्टी के दबने, खराब होने या मिट्टी मिल जाने से ट्रैक की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में GPR तकनीक से पहले ही इन समस्याओं का पता लगाया जा सकेगा और समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे।
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जांच के लिए ट्रैक से गिट्टी हटाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पारंपरिक तरीके से ट्रैक के नीचे की स्थिति जानने के लिए कई बार खुदाई या गिट्टी हटाने की आवश्यकता होती थी, जिससे समय और संसाधनों की खपत होती थी। GPR के जरिए बिना किसी बड़े व्यवधान के ट्रैक की जांच संभव होगी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस तकनीक के इस्तेमाल से ट्रैक में आने वाली संभावित खामियों की पहचान पहले ही की जा सकेगी। इससे दुर्घटनाओं की आशंका को कम करने में मदद मिलेगी और यात्रियों की सुरक्षा को बेहतर बनाया जा सकेगा।
उत्तर मध्य रेलवे देश के व्यस्त रेल नेटवर्क में शामिल है, जहां बड़ी संख्या में यात्री और मालगाड़ियां प्रतिदिन संचालित होती हैं। ऐसे में ट्रैक की नियमित निगरानी और रखरखाव बेहद जरूरी है। नई तकनीक के इस्तेमाल से रेलवे को ट्रैक की वास्तविक स्थिति की सटीक जानकारी मिलेगी और मरम्मत कार्यों की योजना अधिक प्रभावी तरीके से बनाई जा सकेगी।
रेलवे लगातार अपने नेटवर्क को आधुनिक बनाने और सुरक्षा मानकों को बढ़ाने पर जोर दे रहा है। GPR तकनीक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इस तकनीक से रेलवे ट्रैक की निगरानी और रखरखाव व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।