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गोरखपुर: भतीजे से रंजिश के चलते पूर्व पार्षद की हत्या, आरोपियों ने कबूला जुर्म

 

जिले के बरगदवा इलाके में पूर्व पार्षद राजकुमार चौहान की हत्या का मामला पुलिस ने सुलझा लिया है। जांच में दोनों आरोपियों ने खुलासा किया है कि उन्होंने राजकुमार की हत्या भतीजे से पुरानी रंजिश और मारपीट का बदला लेने के लिए की। पुलिस ने बताया कि आरोपी राज चौहान उर्फ़ निरहुआ और विपिन यादव हैं, जो डंपर चालक बताए जा रहे हैं।

राजकुमार चौहान को मंगलवार सुबह इलाके में गोली मारकर गंभीर रूप से घायल किया गया था। परिजन उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले गए, लेकिन वहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस सनसनीखेज वारदात ने इलाके में भारी तनाव और चिंता पैदा कर दी थी।

पुलिस ने घटनास्थल के पास लगे लगभग 8 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, जिसमें दो संदिग्ध दिखाई दिए। तकनीकी सर्विलांस और कैमरों की मदद से ही आरोपी पुलिस के कब्जे में आए। पूछताछ में दोनों अपराधियों ने घटना की सच्चाई कबूल कर ली और बताया कि उनके मन में पुरानी रंजिश थी।

भतीजे से विवाद और मारपीट का बदला लिया

पुलिस के अनुसार, करीब 4 महीने से राज चौहान और मृतक के भतीजे नितेश के बीच विवाद चल रहा था। दो महीने पहले नितेश ने राज चौहान की पिटाई की थी, जिसमें राजकुमार चौहान ने अपने भतीजे का समर्थन किया था। यही बात दोनों आरोपियों को नागवार गुज़री और उन्होंने आखिरकार चाचा को मौत के घाट उतार दिया।

आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने पहले राजकुमार चौहान पर फायर कर दिया, उसके बाद चाकुओं से कई वार किए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजन उन्हें अस्पताल ले गए, जहां उनकी मौत हो गई। पुलिस ने मृतक की पत्नी की तहरीर पर आठ नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है जबकि सात को हिरासत में ले लिया गया है। मामले की आगे की जांच जारी है।

परिवार व समाज में रोष

राजकुमार चौहान की मौत से परिवार और इलाके में गहरा आक्रोश है। परिजन न्याय की मांग पर अड़े रहे और शव के साथ कुछ देर के लिए आंदोलन जैसा माहौल भी बन गया। मामले को शांत कराने के लिए राज्यसभा सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल और कैबिनेट मंत्री दारा सिंह चौहान भी पहुंचे और परिजनों को समझाया। शाम को मोहरीपुर के पास घाट पर दाह संस्कार किया गया।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगामी चुनाव की तैयारी

जानकारी के अनुसार, राजकुमार चौहान स्थानीय भाजपा से जुड़े रहे हैं और वे 2027 में बस्ती से विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। उन्हें राज्यसभा सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल का करीबी माना जाता था। घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर हलचल मचाई है बल्कि आगामी चुनावी वर्ष में राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गई है।

पुलिस की कार्रवाई और जांच

घटना के खुलासे के बाद पुलिस ने इलाके में फोरेंसिक टीम और सर्विलांस स्रोतों की मदद से आरोपियों तक पहुंच बनाई। हालांकि हत्या में प्रयुक्त असलहा अभी तक बरामद नहीं हुआ है, लेकिन पुलिस ने दोनों आरोपियों का कबूलनामा ले लिया है और मामले को विस्तार से खंगाल रही है। आगे भी कानूनी कार्रवाई और सबूतों के आधार पर आरोपियों को कठोर सजा दिलाने की कोशिश जारी है।