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पुलिस की हिरासत में अधिवक्ता के साथ मारपीट, चार कर्मी निलंबित

 

ग्रेटर नोएडा के बिसरख थाना क्षेत्र में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि पुलिस एक युवक की तलाश में उसके घर पहुंची थी, लेकिन युवक न मिलने पर पुलिस ने उसके अधिवक्ता भाई को थाने ले जाकर रातभर हिरासत में रखा और मारपीट की।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मामला तब सामने आया जब पुलिस को युवक की तलाश थी। युवक घर पर नहीं मिला, लेकिन उसके अधिवक्ता भाई पर कार्रवाई कर दी गई। अधिवक्ता ने दावा किया कि उसे बिना किसी औपचारिक वारंट या नोटिस के थाने ले जाया गया, और वहां रातभर अन्य पुलिस कर्मियों के साथ शारीरिक उत्पीड़न और मारपीट का सामना करना पड़ा।

इस घटना के बाद अधिवक्ता ने उच्च अधिकारियों और मीडिया से संपर्क कर सुरक्षा और न्याय की मांग की। अधिवक्ता ने कहा कि पुलिस का यह व्यवहार कानून और न्याय व्यवस्था के खिलाफ है और इससे लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों को ठेस पहुंची है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मामले की जांच के दौरान दो दरोगा और अन्य दो पुलिसकर्मी शामिल पाए गए। पुलिस विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए इन चारों कर्मियों को निलंबित कर दिया। अधिकारियों ने कहा कि मामले की आगे की जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस और कानून प्रवर्तन का मुख्य कर्तव्य है कि वह नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करे और किसी भी प्रकार की अनुचित हिरासत या उत्पीड़न से बचे। इस तरह की घटनाएं सार्वजनिक विश्वास और पुलिस की विश्वसनीयता को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं।

स्थानीय लोगों और अधिवक्ता संघ ने इस घटना को लेकर सख्त प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि इस तरह की कार्रवाई के खिलाफ तुरंत कदम न उठाए गए, तो यह कानून व्यवस्था और मानवाधिकारों के लिए खतरा बन सकती है।

कुल मिलाकर, ग्रेटर नोएडा के बिसरख थाना क्षेत्र की यह घटना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। प्रशासन ने तत्काल कर्मियों को निलंबित कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन आम जनता और कानूनी विशेषज्ञ पूरी और निष्पक्ष जांच की अपेक्षा कर रहे हैं।