मां की डांट के डर से चार बच्चे सरसों के खेत में छिपे, पुलिस और एसडीआरएफ ने बचाया
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से एक हैरान कर देने वाला लेकिन राहत भरा मामला सामने आया। यहां चार छोटे बच्चे मां की डांट के डर से घर से निकलकर लगभग 200 मीटर दूर सरसों के खेत में छिप गए। बच्चों ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि उन्होंने घर में खेलते समय खिलौना तोड़ दिया था और डर के कारण बाहर भाग गए।
घटना के बाद परिजनों ने तुरंत पुलिस और एसडीआरएफ (सर्च एंड रेस्क्यू फोर्स) को सूचना दी। सूचना मिलते ही दोनों टीमों ने सघन तलाशी अभियान शुरू किया। तलाशी अभियान में लगभग 17 घंटे का समय लगा और इसमें बच्चों की खोज के लिए आसपास के तालाब का पानी भी निकाला गया।
एसडीआरएफ और पुलिस की मेहनत रंग लाई और आखिरकार बच्चों को खेत में सोते हुए सुरक्षित पाया गया। बच्चों को देखकर राहत की लहर दौड़ गई और परिजन भावुक हो उठे। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद उन्हें परिवार के पास वापस भेजा गया।
घटना के बाद एसपी (सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस) ने बच्चों के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने परिजनों को बच्चों के प्रति प्यार, दुलार और सही तरीके से समझाने की काउंसलिंग दी। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों में भय और जिज्ञासा के कारण इस तरह की घटनाएं हो सकती हैं, इसलिए उन्हें गुस्सा या डांट के बजाय प्यार और समझदारी से संभालना चाहिए।
स्थानीय लोग और पड़ोसी भी इस मामले से स्तब्ध हैं। उन्होंने पुलिस और एसडीआरएफ की तारीफ की और कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए यह एक उदाहरणीय और सफल बचाव अभियान था। उन्होंने बताया कि यह घटना समाज में बच्चों की सुरक्षा और परिवारिक जिम्मेदारी की याद दिलाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों में डर और गलती के कारण इस तरह की भागदौड़ सामान्य होती है। उन्होंने परिजनों को सलाह दी कि बच्चों की गलती पर तुरंत डांटना या सख्त प्रतिक्रिया देना उन्हें और अधिक भयभीत कर सकता है। इसके बजाय शांति और समझदारी से मार्गदर्शन करना अधिक प्रभावी और सुरक्षित होता है।
कुल मिलाकर, गोंडा में चार बच्चों का सरसों के खेत में छिप जाना एक डरावनी घटना थी, लेकिन पुलिस और एसडीआरएफ की त्वरित कार्रवाई और सतर्कता ने इसे सफल बचाव में बदल दिया। बच्चों की सुरक्षा और परिजनों की जिम्मेदारी पर ध्यान देने की यह घटना समाज के लिए महत्वपूर्ण संदेश भी देती है।