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ताजमहल में विदेशी महिला पर्यटक पर बंदर का हमला, हाथ में काटा; एक घंटे तक नहीं मिली एंबुलेंस, दर्द से तड़पती रही

 

दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल में सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। आगरा में ताजमहल घूमने आई दक्षिण कोरिया की एक महिला पर्यटक पर अचानक एक बंदर ने हमला कर दिया। बंदर ने महिला के हाथ में काट लिया, जिससे उसके हाथ से खून बहने लगा। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि घायल पर्यटक को करीब एक घंटे तक एंबुलेंस नहीं मिल सकी और वह दर्द से तड़पती रही।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, महिला पर्यटक ताजमहल परिसर में घूम रही थी, तभी अचानक एक बंदर ने उस पर हमला कर दिया। हमले में बंदर ने उसके हाथ पर काट लिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना के बाद आसपास मौजूद पर्यटकों और सुरक्षाकर्मियों ने महिला की मदद की, लेकिन समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी।

बताया जा रहा है कि घायल महिला के हाथ से लगातार खून बहता रहा। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल एंबुलेंस बुलाने की कोशिश की, लेकिन करीब एक घंटे तक कोई एंबुलेंस नहीं पहुंची। इस दौरान विदेशी पर्यटक दर्द से कराहती रही और प्राथमिक उपचार के इंतजार में बैठी रही। आखिरकार उसे अस्पताल पहुंचाकर इलाज कराया गया।

इस घटना ने ताजमहल जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पर स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हर दिन हजारों देशी-विदेशी पर्यटक यहां पहुंचते हैं, लेकिन आपात स्थिति में तत्काल चिकित्सा सुविधा नहीं मिलना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ताजमहल परिसर और उसके आसपास बंदरों का आतंक लंबे समय से बना हुआ है। पहले भी कई पर्यटकों पर बंदरों के हमले की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद बंदरों को नियंत्रित करने और पर्यटकों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं।

पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं विदेशी पर्यटकों के बीच भारत की छवि को भी प्रभावित कर सकती हैं। उनका कहना है कि विश्व धरोहर स्थल पर वन्यजीव नियंत्रण, पर्याप्त मेडिकल सुविधाएं और त्वरित एंबुलेंस सेवा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

फिलहाल महिला पर्यटक का उपचार कराया गया है और उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। वहीं, घटना के बाद प्रशासन से ताजमहल परिसर में बंदरों के बढ़ते आतंक पर नियंत्रण और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की मांग तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में ऐसे हादसे और गंभीर रूप ले सकते हैं।