चमोली में बादल फटने के बाद कानपुर में बाढ़ का खतरा: हरिद्वार बैराज पर इमरजेंसी, 15 अगस्त तक पहुंच सकता है पानी
उत्तराखंड के चमोली में बादल फटने के बाद गंगा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी की आशंका से उत्तर प्रदेश के कानपुर में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। हालात को देखते हुए हरिद्वार बैराज पर इमरजेंसी घोषित कर दी गई है। बैराज में रिजर्व में रखा पानी लगातार छोड़े जाने की जानकारी सामने आई है। अनुमान है कि हरिद्वार से छोड़ा गया पानी 15 अगस्त तक कानपुर पहुंच सकता है।
चमोली में भारी बारिश और बादल फटने की घटना के बाद उत्तराखंड के कई हिस्सों में नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। इसका असर गंगा के मैदानी क्षेत्रों में भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन ने संभावित स्थिति को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी है।
हरिद्वार बैराज पर इमरजेंसी
गंगा में बढ़ते जलस्तर और लगातार हो रही बारिश के बीच हरिद्वार बैराज पर आपात स्थिति घोषित किए जाने की बात सामने आई है। बैराज में जमा रिजर्व पानी को चरणबद्ध तरीके से छोड़े जाने की जानकारी है।
पानी छोड़े जाने के बाद गंगा के डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ सकता है। इसी वजह से उत्तर प्रदेश के गंगा किनारे बसे जिलों में भी प्रशासन को सतर्क किया जा रहा है।
15 अगस्त तक कानपुर पहुंचने का अनुमान
हरिद्वार से छोड़े जा रहे पानी के कानपुर तक पहुंचने में समय लग सकता है। अनुमान है कि इसका असर 15 अगस्त तक कानपुर में दिखाई दे सकता है। हालांकि वास्तविक स्थिति बारिश, नदी के प्रवाह और रास्ते में जलस्तर पर निर्भर करेगी।
कानपुर में गंगा के जलस्तर पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए निचले इलाकों और नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन और संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रहने की जरूरत है। नदी के किनारे बसे इलाकों में जलस्तर की निगरानी के साथ लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहने की सलाह दी जा सकती है।
गंगा के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी होने की स्थिति में तटवर्ती इलाकों में जलभराव और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन की ओर से समय रहते राहत और बचाव की तैयारियां करना महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल चमोली में बादल फटने के बाद उत्तराखंड से लेकर उत्तर प्रदेश तक गंगा के जलस्तर को लेकर चिंता बढ़ गई है। हरिद्वार से छोड़े जा रहे पानी के संभावित असर को देखते हुए कानपुर प्रशासन की नजर अगले कुछ दिनों के जलस्तर पर रहेगी।