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फ्लिपकार्ट पर बिस्कुट खरीद में ज्यादा कीमत वसूलने का आरोप, उपभोक्ता आयोग ने कंपनी से मांगा जवाब

 

ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर सामान की कीमत को लेकर एक उपभोक्ता ने शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि फ्लिपकार्ट की वेबसाइट से मालकिस्ट क्रैकर बिस्कुट खरीदने के दौरान कंपनी ने एमआरपी से अधिक कीमत वसूल ली। मामले में उपभोक्ता ने दावा किया कि उसे छूट देने की बात कही गई थी, लेकिन डिलीवरी के समय भुगतान की गई राशि और उत्पाद की वास्तविक कीमत में अंतर पाया गया।

शिकायत के अनुसार, उपभोक्ता ने 3 सितंबर 2023 को फ्लिपकार्ट की वेबसाइट के माध्यम से 286 रुपये का भुगतान कर मालकिस्ट क्रैकर बिस्कुट के दो पैकेट बुक किए थे। ऑनलाइन ऑर्डर के समय कंपनी की ओर से बताया गया था कि उत्पाद की एमआरपी पर छूट दी जाएगी और कम कीमत पर सामान उपलब्ध कराया जाएगा।

डिलीवरी के बाद सामने आई कीमत में गड़बड़ी

शिकायतकर्ता का कहना है कि जब ऑर्डर की डिलीवरी मिली और पैकेट की जांच की गई तो पता चला कि सामान के लिए एमआरपी से ज्यादा रुपये लिए गए हैं। इसके बाद उपभोक्ता ने कंपनी से संपर्क कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन संतोषजनक समाधान नहीं मिलने पर उसने उपभोक्ता आयोग का रुख किया।

उपभोक्ता ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दिखाई गई कीमत और वास्तविक उत्पाद मूल्य में अंतर था, जिससे उसे आर्थिक नुकसान हुआ।

कंपनी की जिम्मेदारी पर उठे सवाल

मामले में उपभोक्ता ने कहा कि ऑनलाइन कंपनियों को उत्पाद की कीमत, छूट और एमआरपी से जुड़ी जानकारी स्पष्ट रूप से देनी चाहिए। ग्राहक को भ्रमित करने वाली कीमत व्यवस्था उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन मानी जा सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऑनलाइन खरीदारी में ग्राहकों को डिलीवरी के समय बिल, पैकेट पर दर्ज एमआरपी और भुगतान की गई राशि का मिलान जरूर करना चाहिए। किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर ग्राहक कंपनी के साथ-साथ उपभोक्ता आयोग में भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

उपभोक्ता अधिकारों की बढ़ती जागरूकता

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब ऑनलाइन खरीदारी तेजी से बढ़ रही है और उपभोक्ता कीमतों व सेवाओं को लेकर अधिक सतर्क हो रहे हैं। ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए भी जरूरी हो गया है कि वे उत्पाद की कीमत और ऑफर से जुड़ी जानकारी पूरी पारदर्शिता के साथ उपलब्ध कराएं।

अब इस मामले में आगे की कार्रवाई उपभोक्ता आयोग की प्रक्रिया के अनुसार होगी। शिकायत में लगाए गए आरोपों पर कंपनी का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।