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लॉ स्टूडेंट्स से बोले योगी- पहले यूपी में था ‘रूल ऑफ माफिया’, काफिले के लिए जजों को भी रोक दिया जाता था

 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में कानून के विद्यार्थियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में 2017 से पहले की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि उस समय उत्तर प्रदेश में ‘रूल ऑफ माफिया’ था, जबकि उनकी सरकार ने ‘रूल ऑफ लॉ’ यानी कानून का शासन स्थापित किया है।

माफिया के लिए रोक दिए जाते थे बड़े लोगों के काफिले

योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज के एक माफिया का जिक्र करते हुए कहा कि पहले उसकी स्थिति ऐसी थी कि वह जिस जमीन पर पैर रख देता था, उसे अपनी मान लिया जाता था। मुख्यमंत्री के मुताबिक, उस माफिया के लिए मुख्यमंत्री, राज्यपाल और हाईकोर्ट के जजों के काफिले तक रोक दिए जाते थे, ताकि उसे पहले रास्ता दिया जा सके।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब ऐसे दौर से बाहर निकल चुका है और प्रदेश में कानून का शासन लागू हुआ है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कानून-व्यवस्था में सुधार से राज्य की छवि बदली है और विकास के लिए बेहतर माहौल बना है।

आपातकाल का जिक्र कर समझाया कानून का महत्व

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने 1975 में लगाए गए आपातकाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में 25 जून 1975 एक महत्वपूर्ण तारीख है। उनके अनुसार, आपातकाल ने ‘रूल ऑफ लॉ’ और ‘रूलर ऑफ लॉ’ के बीच का अंतर समझाया।

योगी ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति एचआर खन्ना की असहमति का उदाहरण देते हुए कहा कि संवैधानिक सिद्धांतों की रक्षा के लिए लिया गया फैसला इतिहास में अपनी जगह बनाता है। उन्होंने विधि के विद्यार्थियों से संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहने की अपील की।

युवा वकीलों को दी अन्याय के खिलाफ खड़े होने की सीख

मुख्यमंत्री ने नए वकीलों से कहा कि अन्याय सामने होने पर चुप रहना सही विकल्प नहीं है। उन्होंने विद्यार्थियों को सत्य, धर्म और निरंतर अध्ययन को अपने पेशे का आधार बनाने की सलाह दी। साथ ही कहा कि वकीलों को तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए।

उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन और पारिवारिक विवादों के समाधान में भी युवा अधिवक्ताओं की भूमिका पर जोर दिया। योगी ने कहा कि पेशेवर जीवन में दबाव आने पर भी सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए।

AI के इस्तेमाल पर भी दी सलाह

योगी आदित्यनाथ ने कानूनी क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल का जिक्र करते हुए कहा कि तकनीक काम आसान कर सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय इंसानी विवेक से ही होना चाहिए। उन्होंने आगाह किया कि कानूनी दस्तावेज तैयार करने में लापरवाही किसी निर्दोष व्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर असर डाल सकती है।

समारोह में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में मेधावी विद्यार्थियों को पदक देकर सम्मानित किया गया।