CCTV भी पकड़ न पाए! विग लगाकर बाइक चोरी करता हिस्ट्रीशीटर, फिर उतार देता
बाइक चोरी करने के लिए चोर नए-नए तरीके अपनाते हैं, लेकिन एक हिस्ट्रीशीटर ने पुलिस और सीसीटीवी कैमरों को चकमा देने के लिए ऐसा तरीका अपनाया कि जांच अधिकारी भी हैरान रह गए। आरोपी कथित तौर पर विग लगाकर बाइक चोरी करने निकलता था और वारदात के बाद उसे उतार देता था। इस वजह से सीसीटीवी फुटेज में उसकी पहचान करना पुलिस के लिए मुश्किल हो रहा था।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी पहले अपने सामान्य हुलिए से अलग दिखने के लिए विग पहनता था। इसके बाद वह बाइक चोरी के लिए निकलता और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो जाता। वारदात को अंजाम देने के बाद वह विग उतार देता, जिससे उसका वास्तविक हुलिया फुटेज में दिखाई देता था या अलग-अलग कैमरों में उसकी पहचान बदलती हुई नजर आती थी।
लगातार बाइक चोरी की शिकायतें मिलने के बाद पुलिस ने इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। जांच के दौरान पुलिस को कई घटनाओं में एक संदिग्ध व्यक्ति दिखाई दिया। हालांकि, उसके हुलिए में अंतर होने के कारण शुरुआत में पुलिस को उसकी पहचान करने में परेशानी हुई।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने अलग-अलग घटनाओं की फुटेज को आपस में जोड़कर देखा। पुलिस को शक हुआ कि अलग-अलग हुलिए में दिखाई देने वाला व्यक्ति एक ही हो सकता है। इसके बाद पुराने आपराधिक रिकॉर्ड वाले संदिग्धों की जानकारी जुटाई गई। इसी दौरान पुलिस की नजर एक हिस्ट्रीशीटर पर गई।
पुलिस ने संदिग्ध की गतिविधियों पर नजर रखी और उसके आने-जाने के बारे में जानकारी जुटाई। पूछताछ और जांच के बाद कथित तौर पर आरोपी की भूमिका सामने आई। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर चोरी की गई बाइकों के बारे में पूछताछ की। मामले में बरामदगी और अन्य साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया।
पुलिस के सामने सबसे दिलचस्प बात आरोपी का विग वाला तरीका रहा। सामान्य तौर पर चोरी की घटनाओं में आरोपी सीसीटीवी से बचने के लिए चेहरा ढकने या रास्ता बदलने की कोशिश करते हैं, लेकिन इस मामले में आरोपी ने अपना पूरा हुलिया बदलने का प्रयास किया। उसका मकसद कैमरे में रिकॉर्ड होने के बावजूद पहचान से बचना बताया जा रहा है।
हालांकि, सीसीटीवी फुटेज की मदद से पुलिस ने उसकी गतिविधियों का पैटर्न समझ लिया। अलग-अलग फुटेज में दिखाई दे रही बाइक, कपड़े, चलने का तरीका और घटनास्थल के आसपास की गतिविधियों को जोड़कर जांच आगे बढ़ाई गई। इसी आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंची।
पुलिस अब आरोपी से यह पता लगाने में जुटी है कि उसने अब तक कितनी बाइक चोरी की हैं और इन वारदातों में उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं। चोरी की बाइकों को कहां खपाया जाता था, इस बारे में भी पूछताछ की जा रही है।
इस मामले ने एक बार फिर दिखाया है कि अपराधी पहचान छिपाने के लिए कितने अलग-अलग तरीके अपना सकते हैं। लेकिन सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी जांच और पुराने रिकॉर्ड को जोड़कर की गई कार्रवाई से पुलिस ने कथित तौर पर आरोपी तक पहुंच बनाई। अब आगे की जांच में चोरी की अन्य घटनाओं से उसके संबंधों का पता लगाया जा रहा है।