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डॉक्टर सुसाइड केस: फाइनेंस वालों ने बच्चे से साइन कराए, डिप्रेशन में रातभर नहीं सोए; ठग गरिमा सिंह पर छठा केस

 

गोरखपुर में डॉक्टर की आत्महत्या के मामले में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। आरोप है कि आर्थिक दबाव के बीच फाइनेंस कंपनी से जुड़े लोगों ने डॉक्टर के बच्चे से दस्तावेजों पर साइन कराए थे। परिजनों के मुताबिक, घटना से पहले डॉक्टर मानसिक तनाव में थे और पूरी रात सो नहीं पाए। इसके बाद उन्होंने ऊंचाई से कूदकर जान दे दी।

मामले में कथित ठगी को लेकर गरिमा सिंह के खिलाफ अब छठा केस दर्ज होने की बात सामने आई है। डॉक्टर के परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि डॉक्टर पर किस तरह का आर्थिक दबाव बनाया गया था और फाइनेंस से जुड़े लोगों की भूमिका क्या रही।

परिजनों के अनुसार, डॉक्टर पिछले कुछ समय से लगातार तनाव में थे। आर्थिक लेनदेन और कथित ठगी से जुड़ी परेशानियों के कारण उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। घटना से पहले उन्होंने रातभर ठीक से नींद नहीं ली। परिवार को भी उनकी परेशानी का अंदाजा था, लेकिन किसी को इस तरह की अनहोनी की आशंका नहीं थी।

आरोप है कि फाइनेंस से जुड़े कुछ लोग डॉक्टर के घर पहुंचे और उनके बच्चे से दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए। परिजनों ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बच्चे से किस आधार पर और किन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए, इसकी भी जांच होनी चाहिए।

इसके बाद डॉक्टर ने ऊंचाई से कूदकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस ने परिवार के सदस्यों से पूछताछ कर घटना से पहले की परिस्थितियों की जानकारी जुटाई।

मामले में गरिमा सिंह का नाम भी सामने आया है। परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों और पूर्व शिकायतों के आधार पर उनके खिलाफ यह छठा मामला बताया जा रहा है। पुलिस अब अलग-अलग मामलों में सामने आए आरोपों और उनके बीच संभावित संबंधों की जांच कर रही है।

पुलिस आर्थिक लेनदेन, फाइनेंस से जुड़े दस्तावेज, बैंक खातों और अन्य रिकॉर्ड की भी जांच कर सकती है। इसके अलावा डॉक्टर के परिवार के बयान और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है।

डॉक्टर की मौत के बाद परिवार ने कथित आर्थिक दबाव और ठगी के आरोपों को लेकर कार्रवाई की मांग की है। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते उन्हें राहत मिलती तो शायद स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।

फिलहाल पुलिस आत्महत्या के कारणों और उससे पहले बने कथित आर्थिक दबाव की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। गरिमा सिंह के खिलाफ दर्ज मामलों और डॉक्टर से जुड़े घटनाक्रम की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मौत से पहले डॉक्टर पर किस तरह का दबाव था और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।