पटना में नीट परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा की मौत मामले में डीएनए टेस्ट का फैसला, एफएसएल ने स्पर्म रिपोर्ट दी
बिहार की राजधानी पटना में नीट परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत मामले में जांच में नया और अहम मोड़ आया है। एफएसएल (Forensic Science Laboratory) द्वारा भेजी गई स्पर्म रिपोर्ट के आने के बाद अब मामले में डीएनए टेस्ट के लिए नमूने लिए जा रहे हैं।
जांच अधिकारियों ने बताया कि कुल आठ लोगों के ब्लड सैंपल लिए जा चुके हैं। इनमें मृतका के माता-पिता, रिश्तेदार, आरोपी और अन्य संदिग्ध शामिल हैं। डीएनए परीक्षण से यह स्पष्ट किया जाएगा कि स्पर्म के नमूने किस व्यक्ति से संबंधित हैं और इसके आधार पर मामले में आरोपियों की भूमिका तय की जाएगी।
पुलिस सूत्रों ने कहा कि डीएनए जांच के परिणाम आने के बाद ही इस मामले में आगे की आरोप तय करने और चार्जशीट दायर करने की प्रक्रिया तेज की जाएगी। इससे पहले मृतका की मौत को लेकर कई अस्पष्ट परिस्थितियां और विरोधाभासी बयान सामने आए थे, जिससे मामले की जांच पर दबाव बढ़ गया था।
जांच में शामिल अधिकारी बता रहे हैं कि एफएसएल की रिपोर्ट ने मामले को और संवेदनशील और निर्णायक मोड़ पर ला दिया है। उन्होंने कहा कि जांच टीम अब सभी साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए सटीक निष्कर्ष निकालने की दिशा में काम कर रही है।
परिवार ने पुलिस और प्रशासन से अपील की है कि वे इस मामले में सख्त कार्रवाई और शीघ्र निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करें। मृतका के माता-पिता का कहना है कि उनकी बेटी ने किसी अपराध या गलती का मौका नहीं दिया, लेकिन इसके बावजूद उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने परिवार को तहस-नहस कर दिया।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में स्पर्शक जांच, एफएसएल रिपोर्ट और डीएनए टेस्ट निर्णायक भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि जांच प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी या अनियमितता न्याय की संभावना को कमजोर कर सकती है।
पुलिस ने सभी संदिग्धों और आरोपियों से पूछताछ तेज कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि डीएनए परीक्षण और अन्य फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर अंतिम चार्जशीट तैयार की जाएगी। जांच टीम की प्राथमिकता है कि मामले में जल्द से जल्द सटीक निष्कर्ष और न्याय सुनिश्चित किया जाए।
कुल मिलाकर, पटना में नीट परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा की मौत का मामला अब डीएनए टेस्ट और एफएसएल रिपोर्ट के आधार पर निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। यह जांच न केवल परिवार के लिए न्याय सुनिश्चित करेगी, बल्कि ऐसे संवेदनशील मामलों में सुरक्षा, फोरेंसिक जांच और प्रशासनिक जवाबदेही की अहमियत को भी उजागर करती है।