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जूनियर इंजीनियर पद पर डिप्लोमाधारियों का ही अधिकार, सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेजुएट इंजीनियरों की याचिका खारिज की

 

Supreme Court of India ने जूनियर इंजीनियर (JE) पदों पर नियुक्ति को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि संबंधित सेवा नियमावली के अनुसार इन पदों पर केवल डिप्लोमाधारी अभ्यर्थियों का ही दावा बनता है। अदालत ने इस मामले में हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए ग्रेजुएट इंजीनियरों की याचिका खारिज कर दी।

हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि सेवा नियमों में किसी पद के लिए विशेष शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की गई है, तो उसी के अनुरूप नियुक्तियां की जानी चाहिए। ऐसे में जूनियर इंजीनियर पद के लिए निर्धारित डिप्लोमा योग्यता को दरकिनार नहीं किया जा सकता।

13 अभियंत्रण विभागों की नियमावली को दी गई थी चुनौती

डिग्रीधारी इंजीनियरों ने अपनी याचिका में 13 अभियंत्रण विभागों की सेवा नियमावली को चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि इंजीनियरिंग में डिग्री रखने वाले उम्मीदवारों को भी जूनियर इंजीनियर पदों के लिए पात्र माना जाना चाहिए।

हालांकि अदालत ने माना कि भर्ती प्रक्रिया और पात्रता का निर्धारण नियोक्ता एवं संबंधित विभागों की सेवा नियमावली के आधार पर होता है।

भर्ती नियमों की वैधता बरकरार

फैसले के साथ ही संबंधित विभागों की सेवा नियमावली की वैधता भी बरकरार रही। अदालत ने संकेत दिया कि जब तक नियमों में संशोधन नहीं किया जाता, तब तक भर्ती निर्धारित पात्रता के अनुसार ही होगी।

डिप्लोमाधारी अभ्यर्थियों को बड़ी राहत

इस फैसले को डिप्लोमाधारी अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। लंबे समय से चल रहे इस विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर लगने के बाद अब जूनियर इंजीनियर भर्ती से जुड़े नियमों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है।