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सीमापार से देशविरोधी गतिविधियों के लिए डिजिटल फंडिंग, हैंडलर्स ने अपनाए चार तरीके

 

सीमापार से संचालित होने वाली देशविरोधी गतिविधियों से जुड़े लोगों तक पैसा पहुंचाने के लिए अब डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किए जाने का खुलासा हुआ है। केंद्रीय फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि सीमापार बैठे हैंडलर्स ने फंड ट्रांसफर के पारंपरिक तरीकों के बजाय डिजिटल भुगतान के रास्ते अपनाने शुरू कर दिए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, देश के भीतर मौजूद ऐसे लोगों तक पैसा पहुंचाने के लिए अलग-अलग डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है। जांच एजेंसियों के लिए यह चुनौती इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि डिजिटल लेनदेन के जरिए रकम को कई स्तरों पर ट्रांसफर किया जा सकता है और इसके पीछे मौजूद वास्तविक स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।

चार तरीकों से पहुंचाया जा रहा पैसा

केंद्रीय फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट की रिपोर्ट में डिजिटल फंडिंग के चार तरीकों का जिक्र किया गया है। इन माध्यमों के जरिए सीमापार बैठे हैंडलर्स और देश के भीतर मौजूद लोगों के बीच आर्थिक लेनदेन किए जाने की जानकारी सामने आई है।

रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने अवैध गतिविधियों के लिए धन जुटाने और उसे आगे पहुंचाने के तरीकों को भी बदल दिया है। अब नकद या पारंपरिक बैंकिंग चैनल के अलावा डिजिटल माध्यमों का सहारा लिया जा रहा है।

एजेंसियों के लिए बढ़ी चुनौती

डिजिटल माध्यम से होने वाले लेनदेन की जांच सुरक्षा और वित्तीय एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है। खासकर तब, जब रकम अलग-अलग खातों या माध्यमों से होकर अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती है। ऐसे मामलों में लेनदेन की पूरी कड़ी को समझने के लिए वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रेल की जांच जरूरी होती है।

फाइनेंशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी रिपोर्ट सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों की नजर ऐसे संदिग्ध वित्तीय लेनदेन पर और बढ़ सकती है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करती हैं कि रकम कहां से आई, किस माध्यम से भेजी गई और आखिरकार उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया गया।

डिजिटल ट्रेल से नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश

जांच एजेंसियों के लिए डिजिटल लेनदेन का एक अहम पहलू उसका ट्रेल है। किसी भी संदिग्ध भुगतान की कड़ी को पीछे की ओर ट्रैक कर रकम के स्रोत और उससे जुड़े लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा सकता है। इसी आधार पर सुरक्षा एजेंसियां सीमापार से होने वाली फंडिंग और देश के भीतर मौजूद नेटवर्क के बीच संबंधों की जांच कर सकती हैं।

रिपोर्ट में सामने आया यह पैटर्न सुरक्षा एजेंसियों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देशविरोधी गतिविधियों के लिए होने वाली फंडिंग के तरीके लगातार बदल रहे हैं। डिजिटल भुगतान की सुविधा ने जहां आम लोगों के लिए लेनदेन आसान किया है, वहीं इसका गलत इस्तेमाल रोकना भी एक नई चुनौती बनकर सामने आया है।

अब एजेंसियों का फोकस ऐसे डिजिटल वित्तीय लेनदेन की निगरानी और संदिग्ध नेटवर्क की पहचान पर रहेगा। रिपोर्ट में बताए गए तरीकों के आधार पर वित्तीय और सुरक्षा एजेंसियां संदिग्ध फंडिंग की कड़ियों की जांच कर सकती हैं।