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साइबर ठगों ने रिटायर्ड डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट कर 1.58 करोड़ रुपये हड़प लिए

 

यूपी के गोरखपुर में साइबर ठगों ने 64 वर्षीय रिटायर्ड आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. मंजुला श्रीवास्तव को हैरान कर दिया। जालसाजों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर करीब 1.58 करोड़ रुपये हड़प लिए। यह मामला साइबर अपराध की सुपर गंभीरता और नई रणनीति को दर्शाता है।

सूत्रों के अनुसार, ठगों ने खुद को एटीएस, एनआईए और ईडी के अधिकारी के रूप में पेश किया और डॉक्टर को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी। इसके चलते डॉ. मंजुला को एक सप्ताह तक घर में ही हाउस अरेस्ट कर रखा गया। ठगों ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से उन्हें लगातार निगरानी में रखा और विभिन्न खातों में रकम ट्रांसफर कराई।

गोरखपुर एसपी क्राइम सुधीर जायसवाल ने बताया कि पीड़िता की तहरीर के आधार पर मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है और मामले की गहन जांच चल रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने सभी संबंधित खातों का डिटेल्स बैंक और फाइनेंशियल संस्थानों से मांगा है और ट्रांजेक्शन्स की पुष्टि की जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना साइबर अपराध में नई तकनीक और मानसिक दबाव का उदाहरण है। साइबर ठग अब न केवल ऑनलाइन फर्जी कॉल और मैसेज का उपयोग करते हैं, बल्कि व्हाट्सएप और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर पीड़ितों से बड़ी रकम ऐंठते हैं।

स्थानीय नागरिकों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि बुजुर्गों और रिटायर्ड अधिकारियों को ऐसे धोखाधड़ी के मामलों में सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में सुरक्षा उपायों और बैंकिंग प्रक्रिया की जानकारी होना बेहद जरूरी है।

डॉ. मंजुला श्रीवास्तव की तहरीर में बताया गया कि ठगों ने घर में होने वाले हर कदम पर निगरानी रखी। उन्होंने कहा कि जालसाजों की रणनीति इतनी सूक्ष्म और पेशेवर थी कि शुरुआती दिनों में उन्हें यह समझ ही नहीं आया कि वे ठगी का शिकार हो रही हैं।

एसपी क्राइम ने यह भी बताया कि पुलिस साइबर सेल के सहयोग से डिजिटल फिंगरप्रिंट और ट्रांजेक्शन ट्रेस कर रही है। ठगों की पहचान करने के लिए वीडियो कॉल रिकॉर्डिंग, आईपी एड्रेस और बैंक डिटेल्स की जाँच की जा रही है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी अज्ञात कॉल या मैसेज पर पर्सनल और बैंकिंग जानकारी साझा न करें।

इस घटना ने स्पष्ट कर दिया कि साइबर अपराध में नवीनतम तकनीक और धोखाधड़ी की रणनीति किस हद तक बढ़ गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की घटनाओं से न केवल धन का नुकसान होता है, बल्कि मानसिक तनाव और डर भी उत्पन्न होता है।

कुल मिलाकर, गोरखपुर में डॉ. मंजुला श्रीवास्तव के साथ हुई यह डिजिटल अरेस्ट और करोड़ों की ठगी साइबर अपराध की गंभीरता और उसके खिलाफ सख्त कदम उठाने की जरूरत को उजागर करती है। पुलिस की तत्काल और गहन जांच के बाद ही जालसाजों की पहचान और गिरफ्तारी संभव हो पाएगी।