गाजीपुर के 120 सरकारी स्कूलों पर संकट! नए सत्र में एक भी छात्र का एडमिशन नहीं, क्या बोलीं BSA?
Ghazipur में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है। जिले के करीब 120 सरकारी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के बावजूद एक भी छात्र का एडमिशन नहीं हुआ है। यह आंकड़ा सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, जिन स्कूलों में एक भी दाखिला नहीं हुआ, उनमें अधिकतर प्राथमिक और परिषदीय विद्यालय शामिल हैं। शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के बाद अब इन स्कूलों के भविष्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में घटती छात्र संख्या लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है, लेकिन इस बार स्थिति और गंभीर दिखाई दे रही है।
इस मामले पर Basic Shiksha Parishad की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने कहा है कि विभाग पूरे मामले की समीक्षा कर रहा है। जिन स्कूलों में प्रवेश नहीं हुए हैं, वहां की स्थिति का आकलन किया जाएगा और कारणों की जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि कई स्कूल ऐसे क्षेत्रों में हैं जहां आबादी कम हो गई है या लोग निजी स्कूलों की ओर ज्यादा रुख कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी स्कूलों में छात्रों की घटती संख्या के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें शिक्षकों की कमी, आधारभूत सुविधाओं की स्थिति, निजी स्कूलों का बढ़ता प्रभाव और अभिभावकों की बदलती प्राथमिकताएं शामिल हैं। ग्रामीण इलाकों में भी अब बड़ी संख्या में अभिभावक बच्चों को निजी स्कूलों में भेजना पसंद कर रहे हैं।
स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और नियमित पढ़ाई को लेकर भरोसा कम हुआ है। हालांकि सरकार की ओर से मिड-डे मील, मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन इसके बावजूद कई स्कूल छात्रों को आकर्षित नहीं कर पा रहे हैं।
शिक्षा विभाग अब ऐसे स्कूलों को लेकर नई रणनीति बनाने की तैयारी में है। संभावना जताई जा रही है कि कुछ स्कूलों का विलय किया जा सकता है या वहां विशेष नामांकन अभियान चलाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए जमीनी स्तर पर प्रयास किए जाएंगे।
फिलहाल गाजीपुर के ये 120 स्कूल शिक्षा व्यवस्था की बड़ी चुनौती बनकर सामने आए हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग इन स्कूलों को फिर से सक्रिय और छात्रों से भरपूर बनाने के लिए क्या कदम उठाता है।