×

कफ सीरप तस्करी मामला: सरगना की पत्नी और सहयोगी की शराब दुकानों के लाइसेंस रद्द, नीलामी से 5.27 करोड़ का राजस्व

 

कफ सीरप तस्करी मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य सरगना शुभम जायसवाल की पत्नी वैशाली और उसकी सहयोगी रेखा देवी से जुड़ी शराब दुकानों के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। आबकारी विभाग की इस सख्त कार्रवाई के बाद इन दुकानों की नीलामी प्रक्रिया पूरी की गई, जिससे राज्य को 5.27 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है।

जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई उस जांच के बाद की गई जिसमें कफ सीरप की अवैध तस्करी और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन के नेटवर्क की जांच की जा रही थी। जांच में सामने आया कि आरोपी नेटवर्क से जुड़े कुछ लोगों के नाम पर शराब कारोबार से संबंधित लाइसेंस लिए गए थे, जिनका उपयोग कथित रूप से अवैध गतिविधियों से अर्जित धन को वैध बनाने की दिशा में किया गया।

आबकारी विभाग ने मामले को गंभीर मानते हुए तुरंत प्रभाव से वैशाली और रेखा देवी के नाम पर संचालित शराब दुकानों के लाइसेंस निरस्त कर दिए। इसके बाद इन दुकानों को नियमों के अनुसार नीलामी प्रक्रिया में शामिल किया गया। नीलामी से प्राप्त 5.27 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को विभाग ने राजस्व के रूप में दर्ज किया है।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई पारदर्शिता और नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए की गई है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी प्रकार की संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों या आपराधिक मामलों से जुड़े व्यक्तियों को शराब कारोबार में शामिल नहीं रहने दिया जाएगा।

इस बीच, जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की गहनता से पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि तस्करी के इस कथित नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं और वित्तीय लेनदेन का पूरा पैटर्न क्या था।

सूत्रों के मुताबिक, अभी चार अन्य शराब दुकानों से जुड़ा मामला भी विचाराधीन है, जिनकी जांच जारी है। इन दुकानों के दस्तावेजों और स्वामित्व संरचना की भी समीक्षा की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई को प्रशासन की बड़ी सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से अवैध कारोबार और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

आबकारी विभाग ने यह भी संकेत दिए हैं कि भविष्य में किसी भी लाइसेंसधारी की पृष्ठभूमि और वित्तीय स्रोतों की और सख्ती से जांच की जाएगी, ताकि सिस्टम में पारदर्शिता बनी रहे और अवैध गतिविधियों को बढ़ावा न मिले।

फिलहाल इस पूरे मामले की जांच जारी है और संबंधित एजेंसियां हर पहलू पर नजर बनाए हुए हैं।