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एसआईटी जांच में सामने आए विरोधाभास, अफसरों और कर्मचारियों पर कार्रवाई के संकेत

 

नोएडा में हाल ही में सामने आए बहुचर्चित मामले की जांच कर रही शासन द्वारा गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने दो दिनों के भीतर अपनी जांच प्रक्रिया को तेज करते हुए करीब 150 लोगों के बयान दर्ज किए हैं। इन बयानों में घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीद गवाहों के साथ-साथ पुलिस, नोएडा प्राधिकरण और जिला प्रशासन से जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हैं। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई अहम और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं।

एसआईटी सूत्रों के अनुसार, दर्ज किए गए बयानों में भारी विरोधाभास देखने को मिला है। जहां एक ओर चश्मदीदों ने घटना के समय की परिस्थितियों और प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा किया है, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान इससे अलग नजर आए। कई मामलों में यह अंतर इतना स्पष्ट था कि जांच टीम को दोबारा सवाल पूछने पड़े। इससे यह संकेत मिल रहा है कि या तो तथ्यों को छिपाने की कोशिश की जा रही है या फिर जिम्मेदारी से बचने के लिए अलग-अलग कथन दिए गए हैं।

जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों के बयान भी महत्वपूर्ण रहे। पुलिस की ओर से घटनास्थल पर मौजूद बल, समय पर कार्रवाई और सूचना के आदान-प्रदान को लेकर अलग-अलग दावे किए गए। कुछ अधिकारियों ने जहां समय पर सूचना मिलने की बात कही, वहीं कुछ ने संसाधनों की कमी और निर्देशों के अभाव का हवाला दिया। इससे पुलिस तंत्र के भीतर भी समन्वय की कमी उजागर हुई है।

नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान इस जांच का सबसे अहम हिस्सा माने जा रहे हैं। हाल ही में प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम पर हुई कार्रवाई के बाद अब जांच की आंच अन्य अफसरों और कर्मचारियों तक पहुंचती दिख रही है। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या घटना से पहले आवश्यक सावधानियां बरती गई थीं और क्या संबंधित विभागों ने अपने कर्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन किया था।

प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। शासन इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए यह संकेत दे चुका है कि यदि जांच में लापरवाही या कर्तव्य में चूक पाई गई, तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर आगे निलंबन, विभागीय जांच या अन्य दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।

फिलहाल एसआईटी सभी बयानों और दस्तावेजों का विश्लेषण कर रही है। टीम का फोकस इस बात पर है कि घटना के वास्तविक कारणों और जिम्मेदार व्यक्तियों की स्पष्ट पहचान की जाए। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जांच और तेज होगी और कई और अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। इस पूरे मामले पर शासन और आम जनता की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट से ही यह तय होगा कि आगे किस स्तर पर और किसके खिलाफ कार्रवाई होगी।