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लखनऊ में 2000 करोड़ की सरकारी जमीन हड़पने की साजिश, 10 पूर्व चकबंदी अधिकारियों पर कार्रवाई की संस्तुति

 

राजधानी लखनऊ में करीब 2000 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन को कथित तौर पर हड़पने की साजिश का मामला सामने आया है। मामले की जांच के बाद चकबंदी विभाग में पूर्व में तैनात रहे 10 अधिकारियों की भूमिका भी प्रथम दृष्टया संदिग्ध पाई गई है। अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है। वहीं मामले में जानकीपुरम थाने में मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

बताया जा रहा है कि सरकारी जमीन से जुड़े रिकॉर्ड और चकबंदी प्रक्रिया में कथित तौर पर गड़बड़ी किए जाने का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर इसकी जांच कराई गई। जांच के दौरान दस्तावेजों और संबंधित प्रक्रियाओं की पड़ताल की गई, जिसमें कई स्तरों पर अनियमितताओं की आशंका जताई गई।

10 पूर्व अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

जांच में चकबंदी विभाग में पूर्व में तैनात रहे 10 अधिकारियों की भूमिका प्रथम दृष्टया सामने आने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है। अधिकारियों पर सरकारी जमीन से संबंधित रिकॉर्ड और प्रक्रिया में कथित अनियमितता बरतने के आरोप हैं।

हालांकि जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित अधिकारियों की भूमिका कितनी गंभीर थी। फिलहाल प्रशासन ने प्रथम दृष्टया सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की सिफारिश की है।

2000 करोड़ की जमीन का मामला

मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि जिस सरकारी जमीन को लेकर कथित हेराफेरी की बात सामने आई है, उसकी अनुमानित कीमत करीब 2000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इतनी बड़ी सरकारी संपत्ति से जुड़े मामले ने प्रशासनिक महकमे में भी हलचल पैदा कर दी है।

सरकारी जमीन को निजी हित में इस्तेमाल करने या रिकॉर्ड में हेरफेर के जरिए कब्जे की कोशिश को लेकर प्रशासन सख्त रुख अपना रहा है। मामले में अब पुलिस और संबंधित विभागों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जानकीपुरम थाने में मुकदमा दर्ज

मामले को लेकर जानकीपुरम थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, जमीन से संबंधित दस्तावेजों और चकबंदी रिकॉर्ड की जांच करेगी। इसके अलावा जिन अधिकारियों और अन्य लोगों की भूमिका सामने आई है, उनसे भी पूछताछ की जा सकती है।

पुलिस जांच के दौरान जमीन के रिकॉर्ड में हुए बदलाव, संबंधित आदेशों और दस्तावेजों की सत्यता की भी पड़ताल किए जाने की संभावना है।

जांच के बाद और नाम सामने आने की संभावना

सरकारी जमीन से जुड़े इस मामले में जांच अभी जारी है। ऐसे में अधिकारियों के अलावा अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। प्रशासनिक स्तर पर की गई जांच और पुलिस की विवेचना के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

लखनऊ में सामने आया यह मामला सरकारी जमीन की सुरक्षा और राजस्व रिकॉर्ड में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में कथित साजिश के पीछे कौन-कौन लोग शामिल पाए जाते हैं और सरकारी जमीन को बचाने के लिए प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।