यूपी में चुनाव और जनगणना के बीच टकराव! फरवरी-मार्च में चुनाव की तैयारी, दिल्ली से मिले नए संकेत; अब बदलेगा Census का शेड्यूल?
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी हलचल के बीच अब चुनाव और जनगणना के कार्यक्रम के टकराव का मुद्दा भी अहम हो गया है। पिछले दो विधानसभा चुनाव फरवरी और मार्च के बीच हुए थे। ऐसे में इस बार भी फरवरी-मार्च 2027 में चुनाव होने की संभावना है। दूसरी ओर, जनगणना 2027 का दूसरा चरण भी फरवरी में प्रस्तावित है। दोनों बड़े अभियानों में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की बड़े पैमाने पर ड्यूटी लगती है। ऐसे में प्रशासन के सामने दोनों प्रक्रियाओं को एक साथ संभालने की चुनौती खड़ी हो गई है।
दिल्ली से मिले जनगणना को पहले कराने के संकेत
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र से मिले संकेतों के बाद उत्तर प्रदेश में जनगणना की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। संभावना है कि फरवरी 2027 में होने वाली जनगणना को पहले कराया जाए, ताकि विधानसभा चुनाव के दौरान प्रशासनिक मशीनरी पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। लखनऊ में जनगणना निदेशालय और जिला स्तर पर अधिकारियों की बैठकें भी शुरू हो चुकी हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, एक दिसंबर 2026 से पांच जनवरी 2027 के बीच जनगणना कराने की तैयारी पर काम किया जा रहा है। इसके बाद डेटा को जल्द से जल्द केंद्र सरकार को भेजने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि इस कार्यक्रम पर अंतिम आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
चुनाव समय पर कराने के संकेत
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि चुनाव आयोग पहले ही साफ कर चुका है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव समय पर कराए जाएंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा था कि यूपी में चुनाव फरवरी-मार्च 2027 में ही कराए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर जनगणना के कार्यक्रम को आगे-पीछे किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त हो रहा है, इसलिए उससे पहले चुनाव कराना संवैधानिक रूप से जरूरी है।
इससे पहले चुनाव समय से पहले कराने की अटकलें भी सामने आई थीं। इसकी वजह यही थी कि चुनाव और जनगणना के लिए बड़े पैमाने पर सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों और अधिकारियों की जरूरत पड़ती है। दोनों प्रक्रियाएं एक ही समय पर चलने से मैनपावर की कमी की आशंका जताई गई थी।
जनगणना होगी डिजिटल
जनगणना 2027 देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी। उत्तर प्रदेश में पहले चरण के तहत मकान सूचीकरण और आवास गणना का काम मई-जून 2026 में पूरा किया जा चुका है। दूसरे चरण में फरवरी 2027 में जनसंख्या की गणना प्रस्तावित है। इस चरण में जाति संबंधी आंकड़े भी जुटाए जाने हैं।
ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार जनगणना की अंतिम तारीखों में क्या बदलाव करती है। फिलहाल संकेत यही हैं कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को समय पर कराने के लिए जनगणना के कार्यक्रम को पहले किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो आने वाले महीनों में प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां और तेज होने की उम्मीद है।