नीट समेत प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था सुधारने के लिए केंद्र की पहल, हाई-पावर्ड कमेटी में IIT मद्रास के डायरेक्टर प्रो. वी. कामकोटि शामिल
प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए सीजेपी के प्रदर्शन के बाद परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए केंद्र ने छह सदस्यों वाली हाई-पावर्ड कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी में शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। कमेटी में आईआईटी से जुड़े एकमात्र शिक्षाविद प्रो. वी. कामकोटि को भी जगह दी गई है। प्रो. कामकोटि वर्तमान में आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर हैं और देश के प्रमुख तकनीकी विशेषज्ञों में गिने जाते हैं।
नीट और अन्य परीक्षाओं को लेकर होगी समीक्षा
हाई-पावर्ड कमेटी का मुख्य उद्देश्य देश में आयोजित होने वाली प्रमुख परीक्षाओं की प्रक्रिया की समीक्षा करना और उन्हें अधिक सुरक्षित, पारदर्शी एवं भरोसेमंद बनाना है।कमेटी नीट समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में आने वाली चुनौतियों, परीक्षा संचालन की व्यवस्था, तकनीकी सुरक्षा और पेपर लीक जैसी समस्याओं पर विचार करेगी।
प्रो. वी. कामकोटि से हुई विशेष बातचीत
प्रो. वी. कामकोटि को कमेटी में शामिल किए जाने के बाद परीक्षा व्यवस्था को लेकर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उन्होंने नीट और अन्य परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय साझा की।उन्होंने परीक्षा प्रणाली में तकनीक के बेहतर इस्तेमाल, सुरक्षा उपायों को मजबूत करने और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
परीक्षा प्रणाली में बदलाव की तैयारी
हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक जैसे मामलों को लेकर छात्रों में नाराजगी देखने को मिली है। ऐसे में केंद्र सरकार की ओर से गठित यह कमेटी परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सुझाव देगी।विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल तकनीक, डेटा सुरक्षा और बेहतर निगरानी व्यवस्था के जरिए परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सकता है।
छात्रों का भरोसा बहाल करना बड़ी चुनौती
देशभर में लाखों छात्र नीट, जेईई और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रणाली पर उनका भरोसा बनाए रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।हाई-पावर्ड कमेटी की सिफारिशों के बाद आने वाले समय में परीक्षा आयोजन के तरीके में बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अब सभी की नजरें कमेटी की रिपोर्ट और सुझावों पर टिकी हैं।