केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: उज्ज्वला योजना के तहत अब साल में केवल 4 सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलेंगे
केंद्र सरकार ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों को राहत देने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत बड़ा बदलाव किया है। नए निर्णय के अनुसार अब योजना के लाभार्थियों को मिलने वाले सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडरों की संख्या में कटौती कर दी गई है।
सरकारी व्यवस्था के मुताबिक अब तक पात्र परिवारों को एक वर्ष में 12 सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जाते थे, लेकिन नए नियमों के तहत यह संख्या घटाकर केवल 4 कर दी गई है। इस फैसले के बाद योजना से जुड़े करोड़ों लाभार्थियों पर सीधा असर पड़ने की संभावना है, खासकर उन परिवारों पर जो पूरी तरह रसोई गैस पर निर्भर हैं।
जानकारी के अनुसार, यह बदलाव सब्सिडी वितरण प्रणाली को और अधिक लक्षित और नियंत्रित करने के उद्देश्य से किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे योजना का लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंदों तक सीमित रहेगा और राजकोषीय बोझ भी कम होगा।
इधर, इस फैसले के बाद आम उपभोक्ताओं में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई लाभार्थियों का कहना है कि पहले से ही महंगाई के दौर में रसोई गैस की कीमतें बढ़ी हुई हैं और ऐसे में सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या घटने से घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
वहीं, दूसरी ओर कुछ लोगों का मानना है कि योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को रसोई गैस उपलब्ध कराना है, और सीमित संख्या में सब्सिडी देकर भी यह लक्ष्य पूरा किया जा सकता है, बशर्ते व्यवस्था पारदर्शी हो।
स्थानीय स्तर पर अकबरपुर, भीटी, जलालपुर और टांडा आल… सहित कई क्षेत्रों में इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लाभार्थियों ने कहा कि ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह बदलाव चिंता का विषय है, क्योंकि अधिकांश परिवार पूरे साल रसोई गैस पर निर्भर रहते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस निर्णय से सरकार पर सब्सिडी का वित्तीय दबाव कम हो सकता है, लेकिन इसका सीधा असर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की रसोई व्यवस्था पर पड़ेगा। कुछ सामाजिक संगठनों ने भी मांग की है कि सरकार इस फैसले की समीक्षा करे और जरूरत के आधार पर लचीली व्यवस्था लागू करे।
फिलहाल सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि योजना जारी रहेगी और पात्र लाभार्थियों को निर्धारित संख्या में सिलेंडर सब्सिडी के साथ उपलब्ध कराए जाएंगे। हालांकि, आने वाले दिनों में इस फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस और तेज होने की संभावना है।