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सरकारी स्कूलों में दरी-पट्टी खरीद घोटाले ने पकड़ा तूल, तत्कालीन सीबीईओ निलंबित

 

सरकारी स्कूलों में दरी-पट्टियों की खरीद में कथित अनियमितताओं का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले को लेकर विधानसभा में सवाल उठने के बाद शिक्षा विभाग ने कार्रवाई करते हुए तत्कालीन मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) को निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।

जानकारी के अनुसार सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के बैठने के लिए दरी-पट्टियों की खरीद की गई थी। आरोप है कि इस खरीद प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई और निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। मामले में वित्तीय अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी की भी बात सामने आई है।

जब यह मामला सामने आया तो इसे लेकर विपक्ष और जनप्रतिनिधियों ने विधानसभा में सवाल उठाए। इसके बाद शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रारंभिक जांच शुरू कराई। जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद विभाग ने तत्कालीन सीबीईओ को निलंबित करने का निर्णय लिया।

विभागीय सूत्रों के अनुसार दरी-पट्टियों की खरीद के दौरान निविदा प्रक्रिया और गुणवत्ता से जुड़े नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। साथ ही खरीद की कीमतों और मात्रा को लेकर भी कई सवाल उठाए गए हैं। इसी आधार पर जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकारी योजनाओं और खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है। किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वहीं इस घटना के बाद शिक्षा विभाग में भी हलचल देखी जा रही है। कई अधिकारी और कर्मचारी अब इस मामले से जुड़े दस्तावेजों और प्रक्रियाओं की जांच में जुटे हुए हैं। विभाग यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इस मामले में और कौन-कौन जिम्मेदार हो सकता है।

स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में छात्रों की सुविधाओं के लिए आने वाले बजट का सही उपयोग होना चाहिए। यदि खरीद प्रक्रियाओं में अनियमितता होती है तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की सुविधाओं पर पड़ता है।

फिलहाल तत्कालीन सीबीईओ को निलंबित किए जाने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। शिक्षा विभाग की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि दरी-पट्टी खरीद मामले में वास्तव में क्या अनियमितताएं हुईं और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार है।