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अलीगढ़ में मशहूर ‘प्रेमी पराठा’ समेत 7 दुकानों पर बुलडोजर कार्रवाई, दुकानदारों ने जताया विरोध; बोले- बिना नोटिस अचानक पहुंची टीम

 

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में मशहूर ‘प्रेमी पराठा’ की दुकान समेत सात दुकानों पर बुलडोजर कार्रवाई किए जाने का मामला सामने आया है। कार्रवाई के बाद दुकानदारों ने नाराजगी जताते हुए प्रशासन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। दुकानदारों का आरोप है कि उन्हें दुकान खाली करने के लिए पहले कोई नोटिस या सूचना नहीं दी गई। उनका कहना है कि टीम अचानक मौके पर पहुंची और दुकानें खाली करने को कहा। वहीं, एक दुकानदार ने दावा किया कि उसकी दुकान से जुड़ा मामला अभी अदालत में विचाराधीन है।

अचानक पहुंची टीम, दुकानदारों ने जताई आपत्ति

जानकारी के मुताबिक, अलीगढ़ में संबंधित स्थान पर प्रशासनिक टीम ने कार्रवाई करते हुए सात दुकानों को बुलडोजर से हटाया। इनमें शहर की चर्चित ‘प्रेमी पराठा’ दुकान भी शामिल बताई जा रही है। कार्रवाई के दौरान दुकानदारों ने विरोध जताया और कहा कि उन्हें पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी।

दुकानदारों का कहना है कि यदि दुकानें हटाने को लेकर कोई आदेश था, तो उन्हें नियमानुसार पहले इसकी सूचना दी जानी चाहिए थी। अचानक कार्रवाई होने से उन्हें सामान हटाने और अपने कारोबार को बचाने का पर्याप्त समय नहीं मिला।

दुकानदार ने कोर्ट में मामला लंबित होने का किया दावा

कार्रवाई के दौरान एक दुकानदार ने दावा किया कि उसकी दुकान से संबंधित मामला अदालत में विचाराधीन है। उसने सवाल उठाया कि जब मामला कोर्ट में लंबित है, तो कार्रवाई किस आधार पर की गई।

हालांकि, इस दावे की पुष्टि के लिए संबंधित न्यायालय के आदेश, मामले की स्थिति और प्रशासन की ओर से जारी दस्तावेजों की जानकारी आवश्यक है। किसी मामले का अदालत में लंबित होना अपने आप कार्रवाई पर रोक नहीं लगाता; इसके लिए संबंधित अदालत के आदेश और मामले की प्रकृति देखना जरूरी होता है।

प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल

दुकानदारों की आपत्ति का मुख्य मुद्दा कार्रवाई से पहले नोटिस दिए जाने और कानूनी प्रक्रिया का पालन किए जाने से जुड़ा है। आम तौर पर अतिक्रमण या अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई संबंधित कानून, सक्षम प्राधिकारी के आदेश और लागू प्रक्रिया के अनुसार की जाती है। परिस्थितियों के आधार पर नोटिस, सुनवाई या अन्य औपचारिकताओं के नियम अलग हो सकते हैं।

ऐसे में इस मामले में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि दुकानें किस आधार पर हटाई गईं, क्या वे अतिक्रमण की श्रेणी में थीं और कार्रवाई के लिए कौन-सा आदेश जारी किया गया था।

प्रशासन के आधिकारिक पक्ष का इंतजार

फिलहाल दुकानदारों ने कार्रवाई पर आपत्ति जताई है और पूर्व सूचना नहीं दिए जाने का आरोप लगाया है। वहीं, कार्रवाई का आधार और नोटिस से जुड़ी स्थिति स्पष्ट करने के लिए प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।

यदि किसी दुकानदार का मामला वास्तव में अदालत में लंबित है, तो संबंधित आदेशों और कानूनी स्थिति की जांच भी अहम होगी। प्रशासन के दस्तावेज और दुकानदारों के दावों की पुष्टि होने के बाद ही पूरी घटना की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।